बल
यह वह बाहरी कारक होता है जो किसी पिंड या वस्तु पर लगा कर या तो उसकी गति में परिवर्तन करता है या करने का प्रयास करता है। यह किसी विराम अवस्था (state of rest) में स्थित वस्तु को गति अवस्था में लाता है।
बलों के बाह्य रूप (external form of force )
1. आकर्षण (Attraction):- = इसमें बिना किसी संपर्क के एक वस्तु दूसरी वस्तु को अपनी ओर खींचती हैं जैसे चुंबक के दो है असमान धुव्रों के बीच का बल आकर्षण बल होता है।
2. प्रतिकर्षण (Repulsion):- इसमें एक वस्तु बिना किसी संपर्क के दूसरी वस्तु को दूर धकेलती हैं जैसे चुंबक के दो समान ध्रुव एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
3. कर्षण (Pull):- जब किसी वस्तु को किसी अन्य माध्यम के सहारे खींचा जाता है तो वह आकर्षण बल कहलाता है जैसे कुएं से पानी की भरी बाल्टी रस्सी के सहारे खींची जाती हैं। यह बल किसी धागे या दृढ माध्यम के सहारे लगता है।
4. अपकर्षण (Push):- इस बल द्वारा कोई वस्तु ढकेली जाती है। यह बल भी किसी दृढ़ वस्तु के सहारे लगता है। जैसे किसी बंद गाड़ी को धक्का मारकर स्टार्ट करना।
5. तनाव (Tension):- किसी वस्तु पर खिंचाव से रस्सी, तार या धागों में जो खिंचाव उत्पन्न होता है, उसे तनाव कहते हैं।
6. दाब (Thrust):- जोर किसी एक विशेष क्षेत्र पर ही लगाया गया हो तो वह दाब कहलाता है।