3. दुर्बल नाभिकीय बल (weak nuclear force):-
यह बल रेडियोसक्रियता के दौरान निकलने वाले बीटा कणों के उत्सर्जन के कारण अस्तित्व में आते हैं। यह गुरुत्वाकर्षण बल से मजबूत लेकिन अन्य बलों से कमजोर होता है। यह बल कम दूरी की रेंज (10-15 m )में कार्य करने वाला बल है।
यह बल अत्यंत छोटे जीवन काल वाले प्राथमिक कणों के बीच लगता है। यह गुरुत्वाकर्षण बल से 1025 गुणा अधिक शक्तिशाली होता है। यह वेक्टर बाॅसान (vector boson) नाम के कणों के अदला-बदली से पैदा होते हैं।
4. प्रबल नाभिकीय बल (strong nuclear force):-
किसी नाभिक के अंदर दो प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के बीच लगने वाले आकर्षण बल को प्रबल नाभिकीय बल कहते हैं। यह भी कम दूरी की परास (रेंज) में लगने वाला बल है।
यह बल आवेश पर निर्भर नहीं करता क्योंकि यह आवेशित प्रोटोनों के साथ-साथ उदासीन (netural) न्यूट्रॉनों के बीच भी उतना ही बल लगाता है
• आधुनिक क्वांटम भौतिक शास्त्र के अनुसार दो क्वार्कों (quarks) के बीच कार्यरत बल है।
• इस बल के वाहक को gluon कहते हैं
• यह विश्व का सबसे शक्तिशाली बल है। यह गुरुत्वाकर्षण बल से 1038 गुना तथा दुर्बल नाभिकीय बल से 1013 गुणा अधिक शक्तिशाली है।
=> शक्ति के आधार पर इन बलों का क्रम :-
प्रबल नाभिकीय बल > विद्युत चुंबकीय बल > दुर्बल नाभिकीय बल > गुरुत्वाकर्षण बल