भारतीय संविधान में नागरिकता के समाप्ति के संबंध में प्रावधान

नागरिकता की समाप्ति

• अनुच्छेद -9 में यह प्रावधान किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति किसी विदेशी राज्य (अन्य देश) की नागरिकता प्राप्त करता है तो आप भारत का नागरिक नहीं होगा।
• अनुच्छेद - 10 किसी भी नागरिक को नागरिकता के संरक्षण का अधिकार प्रदान करता है। इस अनुच्छेद में यह प्रावधान किया गया है कि किसी नागरिक की नागरिकता संसद द्वारा बनाए गए कानून के अतिरिक्त किसी अन्य प्रकार से छीनी या समाप्त नहीं की जा सकती।

• अनुच्छेद - 11 संसद को नागरिकता प्राप्ति, समाप्ति एवं नागरिकता संबंधी अन्य प्रबंधों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान करता है।

=> नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार भारतीय नागरिकता की समाप्त 3 आधार पर हो सकती है :-

1. परित्याग  (renuciation)
2. समाप्ति  (पर्यावसान) (termination)
3. वंचित करना (deprivation)

1. परित्याग (renuciation)
भारत का कोई भी वयस्क नागरिक (adult citizen) जो भारत के अलावा किसी अन्य देश का भी नागरिक है वह स्वेच्छा से घोषणा करके अपने नागरिकता को त्याग सकता है।

2. पर्यावसान (termination)
भारत का वह नागरिक जिसे देशीयकरणअथवा पंजीकरण द्वारा स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता ली है तथा वर्तमान में उसने किसी अन्य देश की नागरिकता ले ली है तो उसे भारत की नागरिकता से वंचित  किया जा सकता है।

3. वंचित किया जाना (deprivation)
• ऐसे भारतीय नागरिकता प्राप्त व्यक्ति जिन्होंने पंजीकरण द्वारा भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी, वह केंद्र सरकार के द्वारा नागरिकता से वंचित किया जा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति जन्म से भारतीय नागरिक है तो उसे सामान्य परिस्थितियों में नागरिकता से वंचित नहीं कर सकते।
• भारत सरकार निम्नलिखित में से किसी भी आधार पर व्यक्ति को भारतीय नागरिकता से वंचित कर सकती हैं :-
1. संविधान के प्रति निष्ठा और आस्था न रखने वाले व्यक्ति को
2. युद्ध के समय में शत्रुओं की सहायता करने वाले व्यक्ति को।
3. अवैध रूप से नागरिकता प्राप्त करने वाले व्यक्ति को।
4. देशीयकरण या पंजीकरण द्वारा नागरिक प्राप्त करने के 5 वर्ष के अंदर किसी अन्य देश द्वारा 2 वर्ष से अधिक की सजा दिए जाने पर।
5. लगातार 7 वर्षों से बाहर रहने पर।
6. किसी भारतीय नागरिक स्त्री - पुरुष एक दूसरे देश के स्त्री- पुरुष के साथ विवाह करने पर।

— भारतीय संविधान के अनुच्छेद -14 और अनुच्छेद - 16 प्रत्येक नागरिक को लोक नियोजन व नियुक्तियों में अवसर की समानता प्रदान करता है और जन्म के आधार पर विभेद नहीं करता। इसलिए भारतीय संविधान का कोई भी नियम किसी देशीयकृत नागरिक (naturalized citizen)  प्रधानमंत्री बनने से नहीं रोक सकता।

- अमेरिकी संविधान अपने देशीयकृत नागरिकों को केवल सीनेट सदस्य (भारत की राज्यसभा के सबसे समकक्ष) बनने का अधिकार देता है और अमेरिका में जन्मे व्यक्ति ही अमेरिकी राष्ट्रपति हो सकते हैं।

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