भारत की प्रमुख बैंकिंग दरें -
ये दरे निम्नलिखित हैं-
बैंक दर - यह वह दर होती है जिस पर केन्द्रीय बैंक विनिमय बिल तथा व्यापारिक हुडियों का पुनर्बट्टा करता है । परन्तु भारत में बैंक दर नीति का प्रयोग व्यापारिक बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हुडियों पर ऋण देने तक सीमित है । श्रेष्ठ हुडियों में सहकार प्रतिभूतियाँ एवं प्रमाणिक व्यापारिक बिल शामिल है ।
नगद आरक्षण अनुपात ( Cash Reserve Ratio ) - इसके अन्तर्गत वाणिज्यिक बैंक अपनी कुल देयताओं की एक निश्चित राशि RBI के पास अनिवार्य रूप से सुरक्षित रखते हैं । इसे नकद आरक्षण अनुपात कहते हैं । भारतीय रिजर्व बैंक संशोधन अधिनियम 1962 द्वारा यह अनुपात 3 से 15 प्रतिशत के बीच रखने का प्रावधान किया गया था जिसे 2006 में समाप्त कर दिया गया ।
वैधानिक तरलता अनुपात ( Statutory Liouitity Ratio ) - यह बैंकों की कुल जमाओं का वह भाग है । जो बैंकों को अपने दिन - प्रतिदिन के कार्य के लिए । अपने पास रखना होता है । इसमें नकद , स्वर्ण तथा मान्यता प्राप्त प्रतिभूति रखे जाते है । 23 जनवरी 2007 को बैंकिंग एक्ट 1949 में संशोधन बैंकों की SLR की न्यूनतम सीमा 25 प्रतिशत को समाप्त कर दिया गया है, जबकि अधिकतम सीमा 40 प्रतिशत को यथावत रखा गया ।
रिवर्स रेपो दर - व्यवसायिक बैंकों द्वारा केन्द्रीय बैंक को दिए गए अल्पावधि ऋण के लिए जो ब्याज अदायगी की जाती है , उसे रिवर्स रेपो दर कहते हैं ।
रेपो दर - केन्द्रीय बैंक के पास से अन्य बैंक जो अल्प अवधि ऋण लेते हैं, उसके लिए जो उन्हें ब्याज देना होता है उससे रेप दर कहते हैं । यह हमेशा रिवर्स रेपो दर से 1% ज्यादा होता है ।