Day – 13
- थिसियोलॉजी (Pthisiplogy) – चिकित्सा विज्ञान की इस शाखा में क्षय रोग (Tuberculosis) का सम्पूर्ण अध्ययन किया जाता है।
- शैवालविज्ञान (Phycology) – वनस्पति विज्ञान की इस शाखा में शैवाल नामक पौधों का अध्ययन किया जाता है। शैवाल एक सरल पौधा है जो पृथ्वी के नम स्थानों पे पाया जाता है।
- भौतिकी या भौतिकविज्ञान (Physics) – विज्ञान की इस शाखा मे द्रव्य, ऊर्जा, तथा उनकी अन्योन्यक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।
- भौतिक भूगोल (Physiography) – भूगोल की इस शाखा में पृथ्वी की सतह के आकार तथा उससे सम्बन्धित प्रभावों एवं प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। वास्तव में इसमें सभी प्राकृतिक भौतिक पदार्थो के भूगोल का अध्ययन किया जाता है।
- शरीरक्रियाविज्ञान (Physiology) – यह चिकित्सा विज्ञान की एक शाखा हैं जिसमें सजीवों की विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं जैसे – श्वसन, जनन, वृध्दि, पोषण, उत्सर्जन, आदि का अध्ययन किया जाता है।
- पादपविकासविज्ञान (Phytogeny) – इस शाखा में पौधों की उत्पत्ति एवं उनके विकास का अध्ययन किया जाता है।
- फल-कृषि विज्ञान (Pomology) – यह कृषि विज्ञान की एक शाखा है जिसमें फलों के उत्पादन, वृध्दि, सुरक्षा एवं उनकी नस्ल सुधार, आदि का अध्ययन किया जाता है।
- विकिरणविज्ञान (Radiology) – चिकित्सा विज्ञान की इस शाखा में विभिन्न प्रकार के विकिरणों (X-किरणें, गामा-किरणें आदि) और रेडियोऐक्टिव पदार्थो के चिकित्सा सम्बन्धी (रोगों के निदान व उपचार) उपयोगों का अध्ययन किया जाता है।
- विकिरणचिकित्सा (Radiotherapy) – यह रेडियोलॉजी की ही एक शाखा है जिसमें विकिरण द्वारा रोगों के उपचार का अध्ययन किय जाता है।
- विकृतिविज्ञान (Rheology) – विज्ञान के इस शाखा में द्रव्य के विरूपण तथा उसके प्रवाह का अध्ययन किया जाता है।
- भूकम्प विज्ञान (Seismology) – यह भूगर्भ विज्ञान की वह शाखा है जिसमें पृथ्वी के भूकम्पों के कारण, विस्तार, पुर्वानुमान, आदि सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।
- चन्द्र विज्ञान (Selinology) – विज्ञान की इस नवीन शाखा में चन्द्रमा की उत्पत्ति, उसकी सतह की बनावट एवं उसकी गति का अध्ययन किया जाता है।
शेष फिर अगले नोटस् में...