जल का असामान्य प्रसार

जल का असामान्य प्रसार

      प्रायः सभी प्रकार के द्रव गर्म किये जाने पर उनके आयतन में बढ़ोतरी होती है किन्तु जल 00C से 40C तक गर्म करने पर आयतन में घटता है तथा 40C के बाद बढ़ना प्रारम्भ करता है। इसका तात्पर्य यह है कि 40C पर जल का घनत्व सर्वाधिक होता है। दैनिक जीवन में इसके कई प्रभाव दिखाई देते हैं तो निम्नलिखित हैं-

      1. अत्यधिक ठण्ड में जल के पाइप कभी-कभी फट जाते हैं-ठण्डे प्रदेशों में जाड़े के दिनों पाइपों में बहने वाले जल का तापमान 40C से नीचे गिर जाने पर जल के आयतन में बढ़ोतरी होती है, किन्तु धातु से निर्मित जल का पाइप सिकुड़ता है। इन विपरीत दशाओं के कारण पाइप की दीवारों पर इतना अधिक दाब उत्पन्न होता है कि वे फट जाते है।

      2. ठण्डे प्रदेशों में तालाबों के जम जाने पर भी उनमें मछलियाँ जीवित रहती हैं-ठण्डे प्रदेशों में जाड़े के दिनों वायु का ताप 00C से भी घट जाता है अतः वहाँ पर तालाबों में जल जमने लगता है। वायु का ताप गिरने पर पहले तालाबों के सतह का जल ठण्डा होता है। अतः यह भारी होने के कारण नीचे बैठता है तथा नीचे जल हल्का होने के कारण ऊपर आता रहता है। यह प्रक्रिया तब तक लगातार चलती रहती है जब तक कि सम्पूर्ण तालाब का जल 40C तक नहीं गिर जाता है। जब सतह के जल का ताप 40C से नीचे गिरने लगता है तो इसका घनत्व कम होने लगता है। अतः अब यह नीचे नहीं जाता है तथा 00C तक ठण्डा होकर बर्फ के रूप में सतह पर ही जमने लगता है। जल के जमने की क्रिया ऊपर से नीचे की ओर होती है। इस कारण तालाब का ऊपरी भाग जम जाता है तथा नीचे वाला भाग 40C पर जल की अवस्था में रहता है, जिससे मछलियाँ उसमें जीवित रहती हैं।
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