विकिरण (Radiation) से संबंधित उपयोग

विकिरण (Radiation) से संबंधित उपयोग

      1. चाय की केतली की बाह्य सतह चमकदार बनायी जाती है-चमकदार सतह न तो बाहर से ऊष्मा का अवशोषण करती है तथा न ही भीतर की ऊष्मा बाहर जाने देती है। इसलिए चाय काफी देर तक गरम बनी रहती है।

      2. रेगिस्तान दिन में बहुत गरम तथा रात में बहुत ठण्डे हो जाते हैं-रेत ऊष्मा का एक अच्छा अवशोषक है। ऊष्मा का अच्छा अवशोषक ही ऊष्मा उत्सर्जक होता है। इसलिए दिन के समय रेत सूर्य की ऊष्मा को अवशोषित करके गर्म हो जाता है और रात के समय में रेत अपनी ऊष्मा को विकिरण द्वारा खोकर अधिक ठण्डा हो जाता है।

      3. बादलों वाली रात, स्वच्छ आकाश वाली रात की अपेक्षा गरम होती है-स्वच्छ आकाश वाली रात में पृथ्वी द्वारा छोड़ी गयी विकिरण की ऊष्मा आकाश की ओर चली जाती है। बादल ऊष्मा के बुरे अवशोषक होते हैं इसलिए बादलों वाली रात में पृथ्वी द्वारा छोड़ी गयी विकिरण की ऊष्मा ऊपर आकाश की ओर जाने के बजाय नीचे पृथ्वी की ओर वापस आती है जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी गर्म बनी रहती है।

कृष्ण पिंड - जो वस्तु अपने पृष्ठ पर आपतित सम्पूर्ण विकिरण को पूर्णतया अवशोषित कर लेता है, उसे कृष्ण पिंड कहते हैं। सर्वाधिक अवशोषण क्षमता 96% काजल की होती है काली वस्तु ऊष्मा का अच्छा अवशोषक है।

ग्रीष्म ऋतु में सफेद वस्त्र पहनना बेहतर है-काला या गहरे रंग का वस्त्र विकिरित ऊष्मा का अवशोषण सफेद वस्त्र की अपेक्षा अधिक करता है, क्योंकि काला वस्त्र ऊष्मा का एक अच्छा संवाहक है सफेद वस्त्र सूर्य की विकिरित ऊष्मा को अधिकांशतया परावर्तित कर देता है, जिससे सूर्य की गर्मी सफेद वस्त्र के भीतर बहुत ही कम प्रवेश कर पाती है।

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