Day – 14
- रेशम कीटपालन विज्ञान (Sericulture) – इस शाखा में रेशम के कीड़ो के सुचारु रूप से पालन करने की विधियों तथा कच्चे रेशम के उत्पादन को बढ़ाने के लिए अच्छी नस्ल के कीड़े उत्पन्न करने की तकनीक का अध्ययन किया जाता है।
- वर्णक्रम विज्ञान या स्पेक्ट्रम विज्ञान (Spectroscopy) – यह भौतिक विज्ञान की एक शाखा है जिसमें स्पेक्ट्रोमीटर, स्पेक्ट्रोस्कोप, आदि का प्रयोग करके विभिन्न पदार्थों के वर्णक्रम प्राप्त किए जाते है और उनका विश्लेषण करके पदार्थो की आंतरिक संरचना का अध्ययन किया जाता है।
- स्टॉकियोमेट्री-रासायनिक (Stoichiometry-Chemical) – यह रसायन विज्ञान और रासायनिक प्रौद्योगिकी का ऐसा क्षेत्र है जिसके आधार पर अभिकारकों या उत्पादों की मात्रा की गणना की जाती है।
- वर्गीकरण विज्ञान या वर्गिकी (Taxonomy) – जीवविज्ञान की इस शाखा में जन्तुओं और पौधों को उनकी संरचना एवं गुणों की समानता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
- ऊतक संवर्धन (Tissue Culture) – इस विज्ञान में एक जन्तु कोशिका को पौष्टिक रासायनिक पदार्थों की उपस्थिति में विकसित करके सम्पूर्ण तंतु का निर्माण किया जाता है। आधुनिक चिकित्सा व अनुसन्धान में इस तकनीक व विज्ञान का अत्यधिक महत्व है।
- विषाणु विज्ञान (Virology) – विज्ञान की इस शाखा में विषाणु की संरचना व उससे उत्पन्न होने वाले रोगों का अध्ययन किया जाता है। वास्तव में विषाणु न तो निर्जीव है और न सजीव है, बल्कि यह दोनों के बीच की कड़ी है।
- जन्तुविज्ञान (Zoology) – यह जीवविज्ञान की एक महत्वपूर्ण शाखा है जिसमें जन्तुओं की उत्पत्ति, विकास, संरचना, जैविक प्रक्रियाएं, व्यवहार आदि सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।
- प्राणी भौगोलिकी (Zoogeography) – विज्ञान की इस महत्वपूर्ण शाखा के अन्तर्गत प्राणियों के पृथ्वी पर भौगोलिक वितरण का अध्ययन किया जाता है।
- जाइमोलॉजी (Zymology) – जन्तु विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत किण्वनों का अध्ययन किया जाता है।
नोट : - अगले नोट्स से अब हम भौतिक विज्ञान पर चर्चा करेंगे।