वाष्पीकरण द्वारा शीतलन का दैनिक जीवन में प्रमुख उदाहरण-1

प्रेशर कुकर (Pressure Cooker)- यह एक ऐसा बर्तन है जिसमें भोजन अतिशीघ्र पक जाता है। इसमें दाब बढ़ाया जाता है जिससे जल का क्वथनांक बढ़ जाता है। अतः प्रेशर कुकर के अन्दर पकाये जाने वाले वस्तु को अधिक तापमान प्राप्त होता है तथा भोजन जल्द बन जाता है। अधिक ऊँचाई वाले स्थानों में कुकर अत्यन्त उपयोगी होता है क्योंकि यहाँ का वायुमण्डलीय दाब निम्न होता है। जिससे जल का क्वथनांक निम्न होता है और खाना पकाने में समय अधिक लगता है।

सौर कुकर (Solar Cooker) -यह एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग सौर ऊर्जा का संग्रहण करके उसका उपयोग भोजन पकाने में किया जाता है। सूर्य के प्रकाश का लगभग 1/3 भाग अवरक्त प्रकाश होता है जो वस्तु को गरम कर देता है, जिस पर वह आपतित होता है। यह कुकर काँच के आवरण से ढका रहता है ताकि इसके अन्दर की ऊष्मा ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण अंदर ही रहे। बक्से की भीतरी दीवार काले रंग से रंगी रहती है। जिससे सौर ऊर्जा अधिक मात्रा में अवशोषित हो सके।

थर्मस फ्लाॅस्क (Thermos Flask)-यह एक विशेष बर्तन है जिसमें वस्तुएँ देर तक अपने उसी ताप पर रखी रहती है जिस ताप पर उन्हें रखा गया था। यदि गर्म वस्तु थर्मस में रखी जाये तो वह बहुत देर तक गरम ही बनी रहेगी। थर्मस फ्लाॅस्क में ताप संचरण की तीनों क्रियाओं चालन, संवहन तथा विकिरण को कम किया जाता है। फ्लाॅस्क का मुँह दोहरे ढक्कन से बन्द रहता है, इसलिए फ्लाॅस्क में रखा गया द्रव गर्म या ठंडा बना रहता है।

समुद्री समीर तथा स्थलीय समीर का चलना-यह ऊष्मा संचरण का संवहन संबंधी उपयोग है। दिन के समय सूर्य की गर्मी से जल की अपेक्षा स्थल अतिशीघ्र गर्म हो जाता है। जिससे स्थल की हवायें ऊपर उठती हैं तथा इनका स्थान लेने के लिए समुद्र की ओर से ठंडी हवाएं स्थल की ओर चलने लगती हैं ये हवायें समुद्री समीर कहलाती है। रात में स्थल, जल की अपेक्षा अतिशीघ्र ठण्डा हो जाता है अतः समुद्र के जल के सम्पर्क से गर्म हवाएं ऊपर उठती हैं तथा इसका स्थान लेने के लिए स्थल से समुद्र की ओर हवाएं चलने लगती हैं। इन्हें स्थलीय समीर कहते हैं।

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