समतल दर्पण के उपयोग :
1. बहुरूपदर्शी - इसमें समान लम्बाई तथा समान चैड़ाई के तीन आयताकार समतल दर्पण इस प्रकार 600 के कोण बने। ये तीनों दर्पण एक मोटी नली के अन्दर लगे रहते हैं। इस उपकरण में पारदर्शक शीशे वाले सिरे से नली को देखने पर तथा नली को घुमाने पर नई-नई रंगीन आकृतियां दिखायी पड़ती है। ये आकृतियां रंगीन काँच की प्रतिबिम्ब हैं, जो समतल दर्पणों से बार-बार परावर्तित होने के कारण निर्मित होती है। इसका उपयोग बच्चों के खिलौने के रूप में होता है।
2. परिदर्शी-इस उपकरण का उपयोग पनडुब्बी जहाज तथा युद्ध के समय बंकर में छिपे सैनिकों पर चल रहे दुश्मनों की गतिविधियों को देखने के लिए करते हैं। इसमें दो समतल दर्पण एक दूसरे से 450 कोण पर स्थित होते हैं। इन दर्पणों की परवर्तक सतहें आमने-सामने होती हैं। इसलिए ऊपर वाले सिरे से होकर प्रवेश करने वाली किरणें दर्पण द्वारा परावर्तित होकर नीचे की ओर आती हैं तथा दूसरे दर्पण द्वारा परावर्तित होकर आँखों में प्रवेश करती है।
पैरेलैक्स (Parellex)- प्रेक्षक की गति के कारण दो वस्तुओं की आभासी आपेक्षिक गति को पैरेलैक्स या लम्बन त्रुटि कहते हैं।
उदाहरण-जब चलती हुई रेलगाड़ी की खिड़की से बाहर देखा जाता है तो भूदृश्य के पेड़ तथा दूसरी वस्तुएं एक दूसरे की अपेक्षा चलती हुई प्रतीत होती है। इसलिए किसी दूसरे पेड़ की अपेक्षा कोई एक पेड़ किसी एक क्षण बायीं ओर दिखाई पड़ सकता है तो कुछ सेकेंडों के बाद उसके दायीं ओर।