श्वसन, जैव पदार्थों का अपक्षय, ज्वालामुखी क्रियाएं पृथ्वी के कार्बन चक्र में कार्बन डाइऑक्साइड जोड़ती है । इसको जोड़ने का क्या कारण है ?

पौधों की सजीव कोशिकाओं के द्वारा प्रकाशीय ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करने की क्रिया को प्रकाश संश्लेषण ( फोटोसिन्थेसिस ) कहते हैं । प्रकाश संश्लेषण वह क्रिया है , जिसमें पौधे अपने हरे रंग वाले अंगों ; जैसे - पत्ती द्वारा , सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में , वायु से कार्बन डाइऑक्साइड तथा भूमि से जल लेकर जटिल कार्बनिक खाद्य पदार्थों जैसे कार्बोहाइड्रेट्स का निर्माण करते हैं तथा ऑक्सीजन गैस ( O2 ) बाहर निकालते हैं ।

       प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में पौधों की हरी पत्तियों की कोशिकाओं के अन्दर कार्बन डाइऑक्साइड और पानी के संयोग से पहले साधारण कार्बोहाइड्रेट और बाद में जटिल कार्बोहाइड्रेट का निर्माण होता है । इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन एवं ऊर्जा से भरपूर कार्बोहाइड्रेट [ सूक्रोज , ग्लूकोज , स्टार्च ( मंड ) आदि ) का निर्माण होता है तथा ऑक्सीजन गैस बाहर निकलती है । जल , कार्बन डाइऑक्साइड , सूर्य का प्रकाश तथा क्लोरोफिल ( हरित लवक ) को प्रकाश संश्लेषण का अवयव कहते हैं । इसमें से जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड को प्रकाश संश्लेषण का कच्चा माल कहा जाता है । प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया सबसे महत्त्वपूर्ण जैव - रासायनिक अभिक्रियाओं में से एक है । सीधे या परोक्ष रूप से दुनिया के सभी सजीव इस पर आश्रित हैं । प्रकाश संश्लेषण करने वाले सजीवों को स्वपोषी कहते हैं । अतः प्रकाश संश्लेषण की क्रिया वायुमण्डलीय कार्बन डाइऑक्साइड का प्रयोग करके इसकी मात्रा को कम करती है , जबकि अन्य तीनों कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में वृद्धि करते हैं । श्वसन क्रिया के अन्तर्गत कार्बन डाइऑक्साइड का निष्कासन होता है ।

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