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ट्राॅयोड वाॅल्व - कैथोड, एनोड, ग्रीड एवं तन्तु का संबंध तारों द्वारा वाल्व के आधार के चित्रों से करने पर ट्रायोड वाल्व नामक उपकरण का निर्माण होता है।

ट्रायोड वाल्व के उपयोग-इसका उपयोग प्रवर्धक, दोलित, प्रेषी संसूचक तथा ग्राही की तरह उपयोग किया जाता है।

अतिचालकता - ऐसे पदार्थ जिनमें विशेष परिस्थितियों में विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है एवं चालक बन जाते है, उनमें यदि विद्युत का प्रवाह किया जाये तो वे बिना किसी ऊर्जा क्षय के निरन्तर प्रवाहित होती रहेगी। वे अतिचालक कहलाते हैं तथा उनका यह विशेष लक्षण अतिचालकता कहलाती है।

अतिचालकता के उपयोग

  • अतिशक्तिशाली चुम्बक के निर्माण में।
  • सुपर कम्प्यूटर के निर्माण में।
  • अतिचालक विद्युत चुम्बकीय वलयों का उपयोग कर किसी भी वस्तु को पृथ्वी पर या पृथ्वी से आकाश में प्रेषित करने में।

ट्रांजिस्टर (Transistor)- ट्रांजिस्टर P व N प्रकार के अर्द्धचालकों से निर्मित एक ऐसी इलेक्ट्राॅनिक युक्ति है जो ट्राॅयोड वाॅल्व के स्थान पर प्रयुक्त होता है।

ट्रांजिस्टर के उपयोग- इसका उपयोग आधुनिक रेडियो, टी0वी0, कम्प्यूटर, अंतरिक्ष यानों इत्यादि में होता है।

अर्द्धचालक पदार्थ - ऐसे पदार्थ जिसमें विद्युत आवेश का प्रवाह संचालकों से कम परन्तु कुचालकों से अधिक होता है अर्द्ध चालक पदार्थ कहलाते है। जैसे-सिलिका

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