वोल्टमीटर (Voltmeter) -इसका प्रतिरोध बहुत अधिक होता है। इसका उपयोग परिपथ के किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर (Potential difference) मापने में होता है।
अमीटर (Ammeter)- किसी शष्टयुक्त धारामापी को अमीटर कहते हैं। एक आदर्श अमीटर का प्रतिरोध शून्य होता है। विद्युत धारा को एम्पियर में मापने के लिए अमीटर का प्रयोग किया जाता है।
विद्युत फ्यूज (Electric Fuse) - इसे परिपथ के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है। यह ताँबा, टिन व सीसा की मिश्र धातु से निर्मित होता है एवं इसका गलनांक कम होता है।
विद्युत मोटर - विद्युत धारा के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा किसी चालक से गति उत्पन्न की जा सकती है, इसी सिद्धांत पर विद्युत मोटर कार्य करता है। यह विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
ट्रांसफारमर-यह एक ऐसा उपकरण है, जिसका प्रत्यावर्ती धारा वोल्टता कम या अधिक करने में किया जाता है।
डायनेमो -इस उपकरण का उपयोग यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परावर्तित करने के लिए किया जाता है।
विद्युत सेल -विद्युत सेल में विभिन्न रासायनिक क्रियाओं से रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। ये मुख्यतः निम्न प्रकार के होते हैं- (1) प्राथमिक सेल तथा (2) द्वितीयक सेल।
(1) प्राथमिक सेल -इसमें रासायनिक ऊर्जा सीधे ही विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होती है। उदाहरण- वोल्टीय सेल, शुष्कसेल, डेनियल सेल, लेक्लांशी सेल इत्यादि।
(2) द्वितीयक सेल -इस सेल में पहले विद्युत ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में फिर रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। इसका उपयोग मोटर कार, ट्रकों इत्यादि के इंजनों को स्टार्ट करने में किया जाता है।