संविधान की दसवीं अनुसूची के विषय में जानकारी

 ⚫ हाल ही में यह मुद्दा काफी चर्चा में है क्योंकि इस अनुसूची के अंतर्गत पंजाब विधान सभा द्वारा आम आदमी पार्टी के बागी नेता सुखपाल सिंह खैरा को अयोग्य घोषित करने के लिए नोटिस निर्गत की जाएगी।  
                  क्योंकि सुखपाल सिंह खैरा ने 6 जनवरी को आम आदमी पार्टी से त्यागपत्र दे दिया था लेकिन उन्होंने विधायक का पद नहीं छोड़ा और एक नई पार्टी का भी गठन किया था। 

⚫ दसवीं अनुसूची के विषय में जानकारी- राजनीति में                     दल-बदल करना बहुत पहले से चलता आ रहा है जो राजनीति पर एक प्रकार का धब्बा है और इसे दूर करने के लिए 1967 में राजनीतिक दल बदल पर कानूनी रोक लगाने की चर्चा की गई थी। 
                  अतः आठवीं लोकसभा के चुनाव के बाद सन 1985 में दोनों सदनों ने  अपनी अपनी सहमति से संविधान का 52वां संशोधन पारित किया और राजनीतिक दल बदल पर कानूनी रोक लगा दी और इसे संविधान की दसवीं अनुसूची में डाल दिया गया। 

⚫ मुख्य बिंदु -

⚫ जब कोई निर्दलीय निर्वाचित सदस्य किसी राजनीतिक दल में सम्मिलित हो जाए या फिर कोई मनोनीत सदस्य शपथ लेने के बाद 6 माह के अंदर किसी राजनीतिक दल से सम्मिलित हो इन परिस्थिति पर सदस्यता समाप्त नहीं होती। 

⚫ कोई भी लोकसभा का अध्यक्ष या विधानसभा का अध्यक्ष अपना पद त्याग सकता है और अपनी पुरानी पार्टी में वापस लौट भी सकता है इसको दलबदल नहीं माना जाता है। 

⚫ यदि कोई अध्यक्ष अपनी इच्छा से अपना त्यागपत्र देता है तो उसकी सदस्यता समाप्त हो जाती है या किसी निर्देश के प्रतिकूल मतदान करता है या मतदान में उपस्थित रहता है तो भी उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है लेकिन यदि 15 दिनों के अंदर उसे इस उल्लंघन के लिए क्षमा कर दिया जाए तो उसकी सदस्यता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। 

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