भाषा कौशल एवं उसके प्रकार

भाषा कौशल एवं उसके प्रकार 

भाषा कौशल लेकर व्यक्ति का साधन है। जिसमें सुनने, बोलने, पढ़ने तथा लिखने चार प्रकार के कौशल सम्मिलित होते हैं, किसी व्यक्ति की संप्रेषण की क्षमता उसके भाषा कौशल की दक्षता पर निर्भर करती है भाषा एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा हम अपने विचारों का आदान प्रदान करते हैं। भाषा की प्रभावशीलता का संबंध उसकी बोधगम्यता से होता है छात्रों में भाषा विकास  हेतु निम्नलिखित 4 प्रकार के कौशलों का महत्वपूर्ण स्थान है।

वाचन कौशल

वाचन एक प्रकार की कला है व्यक्ति का सबसे बड़ा आभूषण उसकी वाणी होती है मनुष्य अपने भावों एवं विचारों को बोलकर या लिखकर व्यक्त करता है भावों विचारों का संप्रेषण या प्रकाशन ही रचना  है  रचना के दो मुख्य रूप हैं मौखिक रचना एवं लिखित रचना मौखिक रचना में व्यक्ति अपने विचारों को बोल कर व्यक्त करता है तथा लिखित रचना में व्यक्ति अपने विचारों को लिखकर व्यक्त करता है।

भाषा शिक्षण वाचन एवं लिखने से आरंभ किया जाता है इस संबंध में सभी एकमत नहीं है मांटेसरी शिक्षा प्रणाली लिखने से आरंभ करने के पक्ष में है और अन्य सभी वाचन से आरंभ करने के पक्ष मे, क्योंकि ध्वनि से ज्ञान सरल हो जाता है लिखने से बोलना आसान होता है लिखने से धोनी और लिपि के रूप को समझने में समय भी लगता है परंतु लिपिबद्ध शब्दों को बहुत ही सरलता से  पढ़ाया जा सकता है।

पठन कौशल

यह भाषा सीखने का दूसरा कौशल है लिखित भाषा की पढ़ने की क्रिया को पठन कौशल कहा जाता है। जैसे पुस्तकों को पढ़ना समाचार पत्र को पढ़ना आदि भाषा के संदर्भ में पढ़ने का अर्थ कुछ अलग होता है भावों और विचारों को लिखित भाषा के माध्यम से व्यक्त करना या समझना पठन कहा जाता है। लिखने का उद्देश्य होता है कि भाव और विचारों को हम दूसरों तक पहुंचाएं अन्य व्यक्ति जब उसको लिखित भाषा के रूप में पढेगा तब वह उन भाव एवं विचारों को समझ लेगा ।इस क्रिया को पठन कहते हैं

Posted on by