भाषा भाषा कौशल के प्रकार ll लेखन कौशल एवं श्रव्य कौशल

लेखन कौशल

लेखन कौशल रचना, भाव एवं विचारों की  कलात्मक अभिव्यक्ति है अपने भाव व विचारों को शब्दों में पिरो कर क्रमबद्ध तरीके से लिपि बंद करना सुव्यवस्थित करने की कला लेखन कहलाती है। भावों, विचारों की यह कलात्मक अभिव्यक्ति जब लिखित रूप में होती है तब उसे लेखन अथवा लिखित रचना कहते हैं व्यक्ति की दृष्टि से लेखन तथा वचन परस्पर एक दूसरे के पूरक होते हैं। वाचन से लेखन कठिन होता है लेखन में वर्तनी का विशेष ध्यान रखना पड़ता है जबकि वाचन में उच्चारण का। वाचन मेंं उच्चारण की शुद्धता आवश्यक तत्व है जबकि लेखन में अक्षरों का शुद्ध होना और वर्तनी की शुद्धता आवश्यक है।

श्रवण कौशल

यह भाषा का प्रथम कौशल है। वाचन सुनने और सुनकर उसका अर्थ एवं भाव समझने की क्रिया को सुनने का कौशल कहा जाता है। इस कौशल का सिद्धांत पक्ष ध्वनि विज्ञान के अंतर्गत दिया गया है ।सामान्यतया कानो द्वारा जो ध्वनियााँ ग्रहण की जाती है और मस्तिष्क द्वारा उनकी अनुभूति तथा प्रत्यक्षीकरण किया जाताा है उसी को श्रवण कहते हैं। भाषा के माध्यम से अभिव्यक्त भावों विचारों को सुनकर समझना ही श्रवण कौशल है। भाषा के संदर्भ में अर्थबोध एवं भाव की प्रतीति सुनने के आवश्यक तत्व होते हैं इस प्रकार जब कोई व्यक्ति हमारे सामने अपने भाव एवं विचारों को मौखिक रूप से ग्रहण करता है तो हमारी यह क्रिया श्रवण कौशल कहलाती है।

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