किसी लिफ्ट में पिण्ड का भार, तारत्व, अनुनाद
जब लिफ्ट ऊपर की ओर जा रही है तो उसमें स्थित व्यक्ति को अपना भार बढ़ा हुआ प्रतीत होता है।
जब लिफ्ट नीचे की ओर आ रही है तो उसमें स्थित व्यक्ति को अपना भार घटा हुआ प्रतीत होता है।
जब लिफ्ट एक समान वेग से ऊपर या नीचे चलती है तो व्यक्ति को अपने भार में कोई परिवर्तन प्रतीत नहीं होता।
यदि नीचे गिरते समय लिफ्ट का त्वरण गुरूत्वीय त्वरण से अधिक हो तो व्यक्ति लिफ्ट की सतह से ऊपर उठकर उसकी छत पर जा लगेगा।
यदि दुर्घटनावश लिफ्ट का तार टूट जाये तो वह एक मुक्त पिंड की भाँति गुरूत्वीय त्वरण से नीचे गिरती है। इस दशा में उसमें स्थित व्यक्ति को अपना भार शून्य प्रतीत होता है। यह भारहीनता की अवस्था है।
तारत्व -ध्वनि का वह लक्षण जिसके कारण हम ध्वनि को मोटी या पतली करते है, तारत्व कहलाता है। ध्वनि का तारत्व उसकी आवृत्ति पर निर्भर करता है। पुरूषों में ध्वनि का तारत्व स्त्रियों की अपेक्षा कम होता है। शेर की दहाड़ एवं मच्छरों की भिनभिनाहट में मच्छर की भिनभिनाहट का तारत्व अधिक होता है तथ शेर की दहाड़ का तारत्व कम होता है।
अनुनाद- अनुनाद की क्रिया के कारण ही सैनिकों को किसी पुल पर कदम मिलाकर न चलने की सलाह दी जाती है क्योंकि कदम मिलाकर चलने से सैनिकों के कदमों की आवृत्ति पुल की स्वाभाविक कंपन आवृत्ति के बराबर हो जाती है, जिससे अनुनाद के कारण पुल में बड़े-बड़े आयाम के कंपन उत्पन्न हो जाते हैं। जिसके परिणामस्वरूप पुल के टूटने की संभावना हो जाती है।