गुरुत्व (gravitation) -
पृथ्वी सभी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित (खींचने की) क्षमता रखती है, यह गुण पृथ्वी में गुरुत्वाकर्षण बल के कारण विद्यमान है।
किसी वस्तु पर लगने वाला ग्रेविटेशनल फोर्स ही उसका भार कहलाता है।
पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय बल का मान ध्रुवों पर सर्वाधिक एवं भूमध्य रेखा पर सबसे कम होता है।
किंतु पृथ्वी के केंद्र पर गुरुत्वीय बल का मान 0 होता है।
अतः किसी वस्तु का भार पृथ्वी के केंद्र पर 0 परंतु द्रव्यमान वही होता है।
जबकि चंद्रमा का भी एक आकर्षण बल (गुरुत्वीय बल) होता है जो पृथ्वी के अपेक्षा 1/6 भाग होता है।
इसी कारण जब कोई चंद्रमा पर जाता है तो वह अपने आप को हल्का महसूस करता है।
इसे ऐसे भी समझा जा सकता है की यदि कोई व्यक्ति पृथ्वी पर 1 मीटर उछल सकता है, तो वह चंद्रमा पर 6 मीटर उछलेगा ।
गुरुत्व केंद्र (centre of gravitation) -
किसी वस्तु का समस्त भार जिस आधार बिंदु पर होता है उसे गुरुत्व केंद्र की संज्ञा दी जाती है।
किसी वस्तु में संतुलन रखने हेतु वस्तु का भार (गुरुत्व केंद्र) उस वस्तु के आधार के क्षेत्रफल के ठीक नीचे होना चाहिए, अन्यथा वस्तु असंतुलित होकर गिर जाएगी।
यही वजह है कि जब कोई पर्वत रोही पर्वतों पर चढ़ता है तो वह अपने आप को गुरुत्वाकर्षण केंद्र में रखने के लिए आगे की ओर झुक जाता है।
पलायन वेग (escape velocity) -
वह न्यूनतम वेग जिससे किसी पिंड को पृथ्वी तल से ऊपर फेंके जाने पर वह पिंड गुरूत्वीय क्षेत्र से बाहर अंतरिक्ष में चला जाए, और वापस पृथ्वी पर ना आए तो उसे पलायन वेग कहते हैं।
पृथ्वी के तल पर पलायन वेग 11.2 किलोमीटर/ सेकंड है, जबकि चंद्रमा पर पलायन वेग लगभग 2.4 किलोमीटर प्रति सेकंड है।
चंद्रमा पर गैसों के अणुओं का (वर्ग माध्य, मूल वेग) पलायन वेग से अधिक होता है। जबकि बृहस्पति शनि आदि पर गैसों के अणुओं का वेग पलायन वेग की अपेक्षा कम होने के कारण यहां वायुमंडल पाया जाता है।