संवेग का नियम, गति विषयक न्यूटन का तृतीय नियम, घर्षण

संवेग का नियम, गति विषयक न्यूटन का तृतीय नियम, घर्षण

संवेग का नियम-संवेग परिवर्तन की दर आरोपित बल के समानुपाती होता है दूसरे शब्दों में समान आरोपित बल के अभाव में वस्तुएँ अपने विरामावस्था को बनाये रखती है।

आरोपित बल त्र द्रव्यमान × त्वरण

संवेग त्र द्रव्यमान × वेग

गति विषयक न्यूटन का तृतीय नियम- किसी भी क्रिया के लिए ठीक उसके बराबर परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है। उदाहरण-

1.    राकेट का आगे बढ़ना

2.    ऊँचाई से कूदने पर चोट लगना

3.    बंदूक से गोली छोड़ते समय पीछे की ओर झटका लगना, कुआँ से पानी खींचते समय रस्सी टूट जाने पर व्यक्ति का पीछे की ओर गिर जाना इत्यादि। 

घर्षण

      जब एक वस्तु दूसरी वस्तु की सतह पर फिसलता है, तो फिसलन की गति की दिशा के विपरीत एक प्रतिरोध बल कार्य करता है, जिसे घर्षण बल कहा जाता है। इसकी दिशा सदैव वस्तु की गति की दिशा के विपरीत होती है। घर्षण कम करने के लिए जिस पदार्थ का उपयोग किया जाता है उसे स्नेहक कहते है।

घर्षण बल के उपयोग-

1.    घर्षण बल के कारण ही कोई मनुष्य सीधा खड़ा रहता है।

2.    यदि सड़कों पर घर्षण न हो तो पहिए फिसलने लगते हैं।

3.    पट्टा व पुली के बीच घर्षण न होने पर पट्टा मोटर के पहिए को घुमा न सकेगा।

4.    घर्षण बल कम होने पर हम केले के छिलके एवं बरसात के दिनों में चिकनी सड़क पर फिसल जाते है।
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