ईशा की आठवीं सदी में लिखी गई संगम की तमिल के अंतर्गत कहा गया की टीम संगम 99 90 वर्ष तक चलते रहे उनने 8598 कवि जुटे और 197 पांडे राजा उनके सम पोषक थे इन सम्मेलनों में रचित संगम साहित्य लगभग 300 और 600 इसवी के मध्य संकलित किए गए संगम काल को सामान्यतः दो समूहों में बांटा जा सकता है
1- आख्यान आत्मक
2- उपदेश आत्मक
आख्यान ग्रंथ मे 18 मुख्य ग्रंथ कहलाते हैं इनमें 18 मुख्य ग्रंथ जिनमें 8 पद संकलन और 10 ग्राम में गीत हैं उपदेश आत्मक ग्रंथ जोकि लघु ग्रंथ कहलाते हैं.
संगम ग्रंथों के अतिरिक्त एक और ग्रंथ है जो टोलकप्पियम कहलाता है यह व्याकरण और अलंकार शास्त्र का ग्रंथ है
एक और महत्वपूर्ण तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल है जिसमें दार्शनिक विचार और सूक्तियां हैं तमिल के दो प्रसिद्ध महाकाव्य हैं |
1-सिलप्पाधिकाराम
2-मणिमयक्ले
इन दोनों ग्रंथ की रचना छठी सदी के आसपास हुई| पहला महाकाव्य तमिल साहित्य का उज्जवल सम्रत माना जाता है इनमें एक प्रेम कथा वर्णित है कोवलन नामक एक अमीर अपनी कुलीन धर्मपत्नी कड़क घी की उपेक्षा करके कावेरिपट्टनम की माधवी नामक वेश्या से प्रेम करता है|
शिल्पा दी कारम का रचियता संभवत जैन था जो तमिल देश के सभी राज्यों को कथा स्थल बनाना चाहता था |
और दूसरे महाकाव्य में कोवलन और माधवी के संगम से उत्पन्न कन्या के साहसिक जीवन का वर्णन है|