गुप्त साम्राज्य का पतन-

चंद्रगुप्त द्वितीय के उत्तराधिकारी यों को ईशा की पांचवी सदी के उत्तरार्ध में मध्य एशिया के ह्रूड़ो के आक्रमण का सामना करना पड़ा गुप्त साम्राज्य चंद्रगुप्त की ने ह्रूड़ो को भारत में आगे बढ़ाने से रोकने के लिए अथक प्रयास किए हूड़ घुड़सवारी में कुशल थे तथा संभव के बने   रकाबो का इस्तेमाल करते थे |

458 में आकर हूरों ने पूर्वी मालवा को और मध्य भारत के बड़े हिस्से को अपने अधिकार में कर लिया छठी सदी के आरंभ में गुप्त साम्राज्य बहुत ही छोटा हो गया |

मालवा नरेश ने गुप्त शासकों की सत्ता को भी चुनौती दे दी संपूर्ण उत्तर भारत में अपना प्रभुत्व स्थापित करने के उपलक्ष्य में 532 ईसवी में विजय स्तंभ खड़े किए |सामंत राजाओं ने भी गुप्त साम्राज्य को और भी दुर्लभ बना दिया गुप्त सम्राटों की ओर से उत्तरी बंगाल में नियुक्त शासन अध्यक्ष ने और  सामंतों अर्थात दक्षिण पूर्वी बंगाल उनके सामंतों ने अपने को स्वतंत्र बनाना शुरू कर दिया

यद्यपि विदेशी व्यापार के के पतन से गुप्त साम्राज्य की आए निश्चित रूप से कम हुई होगी जिसके कारण रेशम बुनकरों की एक श्रेणी 473 ईसवी में गुजरात से मालवा चली गई और वहां बुनकरों ने अन्य पैसे अपना लिए|

गुप्त सम्राट का शासन छठी सदी के मध्य तक किसी समाप्ति की ओर अग्रसर हो चुका था|

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