* जैव उर्वरक सूक्ष्म जीवों व जीवाणुओं से युक्त खाद है।
* इस कार में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव मंडल में पहले से विद्यमान नाइट्रोजन को फसलों को उपलब्ध कराते हैं । यह मिट्टी में मौजूद अघुलनशील फास्फोरस को जल में घुलनशील बनाकर पौधों को उपलब्ध कराने का भी कार्य करते हैं। * वैज्ञानिक प्रयोग द्वारा यह सिद्ध हो चुका है कि जैविक खाद के प्रयोग से 30 से 40 के ग्रह नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर भूमि को प्राप्त हो जाती है तथा उपज 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
*फॉस्फोबैक्टीरिया तथा माइक्रोराइजा नमक जैव उर्वरकों के प्रयोग से खेत में फास्फोरस की उपलब्धता 20 से 30% तक बढ़ जाती है।
* जैविक खाद के प्रयोग से पर्यावरण सुरक्षित रहता है। इससे फसलों में मृदाजन्य रोग नहीं होते तथा खेत में लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ती है।
* अध्ययन की सुविधा हेतु जैव उर्वरकों को बृहद रूप से चार भागों में बांटा जा सकता है--
1. नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जैव उर्वरक--राइजोबियम, एजेटोबैक्टर, एजोस्प्रिरिलम, नील हरित शैवाल तथा एजोला।
* नील हरित शैवाल एजोला का सहचारी है और इसे साथ में मिलाने से अच्छी उर्वरता प्राप्त होती है नील हरित शैवाल एक प्रोकैरियोटिक शैवाल होते हैं, जबकि एजोला एक जलीय फर्न है ।