मानवतावाद-

 पुनर्जागरण की विचारधारा की मुख्य विशेषता मानवतावाद की यह पुनर्जागरण का केंद्र बिंदु था बुनियादी तौर पर इसमें और पारलौकिक के स्थान पर मानवीय तथा प्राकृतिक सत्ता को महत्व दिया | मानवतावाद एक ऐसी विचारधारा थी जिसमें मानव का गुणगान गया |और उसके सारभूत मान मर्यादा पर बल दिया गया उसकी आभार सर्जन शक्ति में अटूट आस्था व्यक्त की गई  और व्यक्ति के स्वतंत्र और व्यक्ति के आहार अहरणीय  अधिकारों  घोषणा की गई इसका सरोकार सभी तरह के सांसारिक दुख भोगने वाले रक्त मांस के मानव से था |

इसमें धार्मिक आडंबरओं का विरोध किया और मानव के सुख भोग के अधिकार व सांसारिक  इच्छाओं एवं आवश्यकताओं की पूर्ति किए जाने को अत्यधिक समर्थन दिया|

पुनर्जागरण काल के व्यक्ति ज्ञान के भूखे थे उन्होंने अनुभव किया कि मनुष्य का जीवन महत्वपूर्ण है  साहित्य और इतिहास को अब मानविकी कहा जाने लगा इनका मुख्य उद्देश्य मुख्य रूप से मानव के इस संसार के क्रियाकलापों को समझना था ना की मृत्यु के उपरांत जीवन को पुनर्जागरण काल के कलाकारों ने अपने विषय तो बाइबल से लिए थे अनुमानों का चित्रण समस्त पार्थिव सौंदर्य और खोज के साथ किया |

इसने दैवीय तथा पारलौकिक तत्वों के स्थान पर इहलौकिक तत्त्वों औऱ   इसने मानव से आग्रह किया |

कि वह चर्च प्रति द्वारा प्रतिपादित परलोक की चिंता छोड़ कर पर सुख प्राप्त करने का प्रयास करें

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