अभी हाल ही में अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा था कि अमेरिका द्वारा ईरान की सरकार पर दबाव बनाने के अभियान को अधिक प्रभावशाली किया जाएगा और यह प्रक्रिया तब तक नहीं कम की जाएगी जब तक ईरान के नेता अपने विनाशकारी रवैया में परिवर्तन नहीं करेंगे और लोगों के अधिकार का सम्मान नहीं करते और बातचीत करने के लिए राजी नहीं होते
माइक पॉम्पियो ने यह घोषणा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान से तेल आयात पर अतिरिक्त महत्वपूर्ण कटौती अपवाद जारी ना करने के बाद की गई है।
इस विवाद का प्रभाव -
-इससे ईरान के राजस्व का मुख्य स्त्रोत जो कि तेल निर्यात है उस पर प्रतिबंध की वजह से संकट आने की पूर्ण संभावना है।
-वर्ष 2018 में वैश्विक तेल उत्पादन में इरान का हिस्सा 4% है इस पर भी असर पड़ने की संभावना है
-विवाद की वजह से तेल की कीमतों में वृद्धि भी हो सकती है।
महत्वपूर्ण बिंदु -
- अमेरिका और ईरान के विवाद के बाद जापान चीन भारत दक्षिण कोरिया जैसे देश इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
- ईरान भारत को तेल आपूर्ति करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है और दुनिया में सऊदी अरब और इराक का स्थान प्रथम है।
- ईरान के द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 में भारत को 18.4 मिलीयन टन कच्चे तेल की आपूर्ति की गई थी।
- अमेरिका के द्वारा भारत और अन्य 7 देशों को 180 दिनों की अवधि के लिए ईरान से तेल आयात में छूट दी थी जो कि समाप्त कर दी गई है।
अमेरिका-ईरान विवाद का भारत पर प्रभाव-
अमेरिका ईरान के विवाद के बाद अमेरिका के द्वारा दिए गए इस निर्णय से भारत पर काफी प्रभाव पड़ने वाला है क्योंकि हाल ही में वेनेज़ुएला पर भी अमेरिका के द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है जिससे तेल आपूर्ति में भारत के लिए मुश्किलें खड़ी होंगी और इसके साथ-साथ आयात बिल में वृद्धि हो जाने से रुपए पर भी अधिक दबाव पड़ेगा और कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ेगी जिससे महंगाई में बढ़ोतरी होगी।