पारिस्थितिकी जल संतुलन के लिए वन्य जीव का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इनके द्वारा पर्यावरण के बहुत से प्रदूषित पदार्थों को समाप्त किया जता है जिससे पर्यावरण को स्वस्थ बनाए रखने में सहयोग प्रदान करते हैं।
* भारत में अनेक प्रकार के वन्य जीव जंतु पाए जाते हैं परंतु उचित संरक्षण के अभाव के कारण उनकी अनेक प्रजातियां या तो नष्ट हो चुकी हैं अथवा लुप्त प्राय हैं । इसका एक प्रमुख कारण वन्य जीव का संहार है। कुछ व्यक्ति अपने मनोरंजन तथा अवशेषों की प्राप्ति हेतु उनका संहार करते हैं परिणाम स्वरूप इन की अनेक प्रजातियां ही विलुप्त हो गई है । विगत 100 वर्षों में विलुप्त होने वाले पक्षियों में अमेरिकी सुनहरी ईगल, सफेद चोंच वाला वुडपैकर, जंगली टर्की आदि प्रमुख है। सफेद शेर, हाथी,दरियाई घोड़ा, कस्तूरी मृग, स्वेतमृग आदि अब भारत के दुर्लभ जीव हैं। मस्क बैल एवं नीली व्हेल लुप्त होनेे की सीमा पर है। मोर तथा पश्चिमी राजस्थान में पाया जाने वाला गोडावन पक्षी भी कम होते जा रहे हैं। औद्योगिक संस्थानों से निकलने वाले जल भी बड़ी संख्या में मछली और अन्य छोटे जलीय जीवो की मृत्यु हो जाती है इससे जलीय पौधों की भी अनेेक प्रजातियां नष्ट हो चुकी हैं।
*जब जीव की कोई प्रजाति विलुप्त होती है तो सजीव जगत के एक अंश को हम सदैव के लिए खो देते हैं। इससे खाद्य श्रंखला पर गहरा प्रभाव पड़ता है तथा पर्यावरण एवं जंतु जगत का संतुलन गड़बड़ा जाता है। यह विचारणीय है कि यदि खाद्य श्रंखला ही नष्ट हो जाएगी तो पर्यावरण को भी नष्ट होने से नहीं बचा जा सकेगा। परिणाम स्वरूप मनुष्य स्वयं भी विलुप्त हो जाएगा।