क्योटो संधि क्या है

ग्लोबल वार्मिंग पर नियंत्रण के उद्देश्य से जापान के क्योटो मे 11 दिसंबर 1997 को हस्ताक्षरित क्योटो संधि 16 फरवरी 2005 में अस्तित्व में आ गई । वैश्विक तापमान पर नियंत्रण के लिए ऊष्मा उत्पन्न करने वाली गैसों के उत्सर्जन को सीमित रखने का प्रावधान 34 उद्योग राष्ट्र सहित कुल 141 राष्ट्रों द्वारा अपनाया गया। इसके लिए आयोग दृष्टि से विकसित राष्ट्रों को ग्रीन हाउस गैसों का कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन 1990 के स्तर में 5.2 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य 2008 से 2012 के मध्य रखा गया।

स्पेन  आयरलैंड  व पुर्तगाल आदि कुछ रास्तों में यह उत्सर्जन पहले से ही लक्ष्य से कम है जबकि अमरीका इसे व्यावहारिक बताते हुए संधि से हटने की घोषणा सन् 2001 में ही कर चुका है

क्यूटो  संधि में जिन  6 गैसों के  उत्सर्जन की बात कही गई है उनमें कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, क्लोरोफ्लोरोकार्बन व सल्फर हेक्साक्लोरोराइड आदि गैसे शामिल हैं।

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