फ्रांस की क्रांति के कारण-

फ्रांस की क्रांति के निम्नलिखित कारण थे-
१.) राजनीतिक कारण- 18 वीं सदी के उत्तरार्ध में राजा की निरंकुशता योग्यता एवं शासन संबंधी अनियमितताओं ने जनता को क्रांति के लिए मजबूर कर दिया। फ्रांस के राजा अपनी शानोशौकत के लिए राजकोश का दुरुपयोग करते थे जिसके कारण फ्रांस की जनता ने राजतंत्र का मुखर विरोध किया । राजाओं की निरंकुशता के कारण जनसाधारण के मन में क्रांति की चिंगारी सुलगने लगी। इस समय फ्रांस की कानून व्यवस्था में भी अनेक मौलिक दोष उत्पन्न हो गए थे।
धनी पादरी और सामंत राजकोषीय करो से मुक्त थे ,जबकि गरीब जनता करों के भारी बोझ से दबी थी। देश पर विदेशी ऋण का बोझ बढ़ता जा रहा था व्यापार की दशा भी संतोषजनक नहीं रह गई थी अत: इन परिस्थितियों ने फ्रांस की जनता को क्रांति के लिए मजबूर कर दिया।

२.)आर्थिक कारण- राजघराने द्वारा धन पानी की तरह बहाया जाता था राजघराने के इर्द-गिर्द घूमने वाले लोग जनकल्याण की ओर ध्यान ना देकर अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति में लिप्त थे। अंदर ही अंदर इन लोगों ने राजकोष को खाली कर दिया था। साथ ही इंग्लैंड के साथ लगातार युद्ध होने से भी राजकोश पर बुरा प्रभाव पड़ा।धन की कमी को पूरा करने के लिए जनता पर अनेक कर लगाया जाते थे और उनकी वसूली भी बड़ी निर्दयता पूर्वक की जाती थी कृषकों की आय एवं उपज का अधिकांश हिस्सा करों के रूप में ले लिया जाता था।इस प्रकार दोषपूर्ण अर्थव्यवस्था ने भी प्रांत में क्रांति को प्रेरित करने का कार्य किया।
३.)- सामाजिक कारण- फ्रांस का समाज वर्ग भेद पर आधारित था। इस समय फ्रांस के समाज में 3 वर्ग थे -
पादरी वर्ग
कुलीन वर्ग
जनसाधारण वर्ग 
पादरी वर्ग और कुलीन वर्ग भोग विलासिता पूर्ण जीवन जीते थे।
मध्यम वर्ग में अध्यापक वकील व्यापारी कभी इत्यादि आते थे । इस वर्ग की स्थिति थोड़ी बहुत ठीक थी परंतु यह समाज में उचित उपेक्षित थे।
किसान वर्ग में मुख्य रूप से किसान सम्मिलित है फ्रांस में इनकी जनसंख्या 80% के लगभग थी। इनका आर्थिक जीवन संकटग्रस्त था तथा यह वर्ग करों के बोझ से दबा था दयनीय आर्थिक स्थिति के कारण यह वर्ग भी संतुष्ट ना था। इन्हीं परिस्थितियों के कारण क्रांति का जन्म हुआ।

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