बैरम खान का संरक्षण काल (1556 - 1560)

बैरम खां जो पर्सिया का रहने वाला सिया संप्रदाय का था, जिसका विवाह हुमायूं की भांजी सलीमा बेगम से हुआ था । इसी से अब्दुल रहीम नामक पुत्र का जन्म हुआ । बैरम खां हुमायूं के साथ कन्नौज के युद्ध से ही जुड़ा और हुमायूं के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अकबर के लिए चाणक्य जैसी भूमिका निभाई । अकबर इसे प्रेम से खान बाबा कह कर पुकारते थे । पानीपत के युद्ध विजय में सर्वाधिक निर्णायक भूमिका इसी की थी । इस आधार पर कहा जा सकता है, कि अकबर को सम्राज्य वापस दिलाने में (हेमू से) बैरम खां की सबसे बड़ा सहयोगी था और जब गद्दी पर बैठा इसे वकील के पद (वजीर) नियुक्त किया ।

वकील के पद के कार्य :-
इस पद से बैरम खां ढेरों महत्वपूर्ण कार्य किए । कई महत्वपूर्ण अभियान पर साम्राज्य के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जैसे- कालिंजर और जौनपुर के क्षेत्रों पर अधिकार, राजस्थान, रणथंबोर पर अभियान जहां सफलता नहीं मिल सकी थी, लेकिन फिर भी प्रयास की सार्थकता को नकारा नहीं जा सकता था । इन कार्यों के चलते बैरम खां की महत्वता निरंतर बढ़ती गई। जिसके परिणाम स्वरूप इससे  द्वेष और ईर्ष्या करने वालों में वृद्धि हुई । जिसमें महत्वपूर्ण पेटिकोट शासन था । जिसमें शामिल लोगों में महामअंगा, इसका पुत्र आदम खां, पुत्री जीजी अनगा और दामाद शिहाबुद्दीन महत्वपूर्ण रहा ।

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