जैसे-जैसे बैरम खां महत्वपूर्ण होता गया । यह बड़े बड़े फैसले स्वयं लेने लगा । उद्देश्य में सार्थकता के बावजूद अधिकार का दुरुपयोग करने लगा । इसी बीच इसने एक बड़ा फैसला लिया और सद्र- उस्स- सद्र नामक बड़े और महत्वपूर्ण पद पर बगैर अनुमति के शेख गद्दायी नामक एक शिया संप्रदाय के एक व्यक्ति को नियुक्त किया । इसी बात को लेकर इससे ईर्ष्या व द्वेष करने वाले लोगों ने अकबर को बैरम के विरुद्ध भड़काने में सफल हुए और अकबर को भी इस अधिकार के दुरुपयोग का एहसास हुआ ।
परिणाम :-
अकबर ने शिकार पर जाने का बहाना कर आगरा से दिल्ली गये और बैरम की बर्खास्तगी का आदेश दिया ।
इससे बैरम खान की क्या प्रतिक्रिया रही ?
बैरम खां अकबर के आदेश पर कोई प्रतिक्रिया नहीं किया और स्वेच्छा से पद का त्याग कर अकबर से मिलने दिल्ली की ओर बढ़ा , लेकिन इस पर अविश्वास जताते हुए पीर मोहम्मद के नेतृत्व में मुगल सेना ने पीछा किया । जिससे नाराज होकर बैरम खां पंजाब की और बढ़ा और सशस्त्र विद्रोह किया ।
इसका परिणाम क्या हुआ ?
व्यास नदी के तट पर तिलवाड़ा का युद्ध हुआ । जिसने बैरम खान पराजित हुआ और अकबर के सामने पेश किया जहां अकबर द्वारा तीन प्रस्ताव दिए गए।
चंदेरी की सूबेदारी
अकबर के व्यक्तिगत का सलाहकार होना
हज की यात्रा पर जाना
उक्त प्रस्ताव में बैरम खां ने हज यात्रा को स्वीकारा और यात्रा पर निकला। इसी दौरान गुजरात में मुबारिज खां नामक व्यक्ति, जिसके पिता को बैरम खां ने मछीवाड़ा के युद्ध में मार दिया था । मौका देख बैरम खां की हत्या की इस घटना के बारे में इस स्मिथ ने कहा यह बड़ी ही दुखद घटना थी ।
अकबर का पश्चाताप
अकबर इस घटना से बहुत दुखी हुआ और पश्चाताप करते हुए बैरम खान की पत्नी सलीमा बेगम से विवाह किया और पुत्र अब्दुल रहीम को पुत्रवत संरक्षण देते हुए खान ए खाना की उपाधि दी ।