फ्रांस की क्रांति की प्रमुख घटनाएं-2

राष्ट्रीय सभा-तृतीय सदन के सदस्यों की इस घोषणा से लुई सोलहवां भयभीत हो गया और उसमें 27 जून 1789 को तीनों सदनों की संयुक्त बैठक की अनुमति दी तथा स्टेट्स जनरल को राष्ट्रीय सभा की मान्यता प्रदान की । इस सभा ने 9 जुलाई 1789  को संविधान सभा का कार्यभार ग्रहण कर लिया।

बास्तील का पतन- राजा और सामंतों ने मिलकर इस सभा को भंग करने की योजना बनाई। पेरिस में यह अफवाह फैल गई कि राजा विदेशी सेना की मदद से देशभक्तों व क्रांतिकारियों को मार डालना चाहता है । इस पर पेरिस की जनता उत्तेजित हो गई और 14 जुलाई 1789को फ्रांस की जनता ने हिंसक आक्रमण कर राजा के अत्याचार की प्रतीक समझी जाने वाली बास्तील की जेल को नष्ट कर दिया और कैदियों को मुक्त कर दिया। यह घटना राजा की निरंकुशता को समाप्त करने का प्रथम सोपान था। इसलिए फ्रांस वासी इस तिथि को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाते हैं।तत्पश्चात राष्ट्रीय महासभा ने 27 जून 1789 सभी से 30 सितंबर 1791 के मध्य प्रांत की सामंतवादी व्यवस्था को समाप्त कर समाजवादी व्यवस्था की आधारशिला रखी और राष्ट्रीय सभा ने 27 अगस्त 1789 को मानव और नागरिकों के अधिकारों की घोषणा की जिसमें उनके अनुसार कानून की दृष्टि में सभी व्यक्ति समान थे। 

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