प्रत्येक जिला स्तर पर एक जिला परिषद का गठन किया गया है।
जिला परिषद का गठन
जिला परिषद के गठन में निम्नलिखित सदस्य होते हैं संपूर्ण जिले को क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में बांट दिया जाता है प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में से एक सदस्य निर्वाचित होता है लगभग 50000 की जनसंख्या पर एक प्रतिनिधि निर्वाचित होता है । जिले की सभी पंचायतों के प्रमुख लोकसभा और राज्यसभा के ऐसे सदस्य जो जिले के किसी भाग या पूरे जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं और जिनका निर्वाचन क्षेत्र जिले के अंतर्गत पड़ता हो राज्यसभा और राज्य विधान परिषद के सदस्य जो जिले के अंतर्गत मतदाता के रूप में पंजीकृत हो
ग्राम पंचायत और पंचायत समिति की तरह जिला परिषद ने भी स्थानों की आरक्षण की व्यवस्था की गई है अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण के साथ-साथ महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है
कार्यकाल
जिला परिषद का कार्यकाल उसकी प्रथम बैठक की निर्धारित तिथि से अगले 5 वर्ष तक का निश्चित किया जाता है।
अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष
जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य भी अपने में से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष निर्वाचित करते हैं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अतिरिक्त अध्यक्ष पद के लिए महिलाओं के लिए भी स्थान आरक्षित रखे गए हैं अध्यक्ष का काम जिला परिषद की बैठकों का सभापतित्व करना है। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष जिला परिषद की बैठक की अध्यक्षता करता है।
मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी
जिला अधिकारी की श्रेणी का पदाधिकारी जिला परिषद का मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी होता है जिसकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद की नीतियों और निर्देशों को कार्यान्वित करता है, वह जिला परिषद के सभी कार्यों और विकास योजनाओं के शीघ्र निष्पादन हेतु आवश्यक कदम उठाता है।