भोजन के पचने से ही हमें ऊर्जा मिलती है और ऊर्जा की आवश्यकता सभी व्यक्ति व प्राणियों को होती है।
अगर हमें ऊर्जा नहीं मिलेगी तो हम शक्ति के अभाव में मुरझा जाएंगे। अतः जब भोजन पचता है तभी हमें ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
भोजन के पाचन में आहार नाल एवं पाचक ग्रंथियां प्रमुख पाचक अंग हैं।
पाचक ग्रंथियों में मुख, मुखगुहा, ग्रासनली, आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत, आदि अंग सम्मिलित होते हैं।
यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है जबकि अमाशय एक मिश्रित ग्रंथि है यह पाचक रस स्रावित करती हैं जिसके माध्यम से भोजन आसानी से पच जाता है।
भोजन का पाचन मुख्यतः दो प्रकार से होता है-
यांत्रिक पाचन एवं रासायनिक पाचन यांत्रिक पाचन मुख में उपस्थित दांतो के द्वारा पीसने की क्रिया आती है जबकि रासायनिक पाचन की क्रिया
मुख गुहा से ग्रास नली में जाते ही श्री गणेश हो जाती है।
यहां 3 जोड़ी लार ग्रंथियां पाई जाती है, जो टायलिन एंजाइम स्त्रावण करती हैं।
अर्थात रसायनिक पाचन एंजाइमों के द्वारा होता है।
दांत में एनिमल शरीर का सबसे कठोर भाग है।
मुख्यतः मनुष्य के आहार नाल की लंबाई 8 से 10 मीटर तक होती है।
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