पाचन तंत्र में उपस्थित अंगों एवं पाचन तंत्र का मानव जीवन में प्रभाव-भाग:-2

बड़ी आंत एवं छोटी आंत के संधि स्थल पर अंधनाल पाया जाता है। जब मनुष्य शाकाहारी था तब अंधनाल (Caecum) सेल्युलोज के पाचन के लिए यह मनुष्य  के शरीर में पाया जाता था जो, अब एक अवशेषी अंग के रूप में बचा हुआ है।

इसका एक भाग 7-10 सेंटीमीटर लंबी सकरी बंद नली के रूप में होता है, जिसे कृमि रूपी परिशेषिका का कहते हैं। इसमें संक्रमण होने से appendicitis नामक रोग हो जाता है।

और कभी-कभी यह अवशेषी अंग बड़ा हो जाता है। तब इसे सर्जरी के द्वारा काटकर बाहर निकाल दिया जाता है।

ग्रास नली- इसमें भोजन का पाचन नहीं होता है किंतु ग्रास नली अमाशय आदि की दीवारों में होने वाली क्रमांकुचन गति की क्रिया को भोजन पीसने, आगे बढ़ाने एवं इंजनों के मिश्रण में सहायता करती है।

आमाशय- इससे प्रोटीन पचाने वाले पेप्सिन एवं रेनिन हारमोंस निकलते हैं।

अग्नाशय (pancrease)- अग्नाशय हल्के गुलाबी रंग की पत्ती के आकार की एक मिश्रित ग्रंथि है।

यह अग्नाशय रस का निर्माण करता है जिसमें तीन एन्जाइम  ट्रिप्सिन, एमाइलेप्सिन तथा स्टेप्सिन पाए जाते हैं जो भोजन के प्रोटीन स्टार्च तथा वसा तत्वों का पाचन करते हैं

यह ग्रंथियां इंसुलिन हार्मोन स्रावित करती हैं जो ग्लूकोज को ग्लाइकोजन में परिवर्तन करने में सहायता करता है।

यकृत (liver)- यह शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है यह चॉकलेटी गहरे भूरे रंग की ठोस रचना है।

यकृत में पित्त रस का निर्माण होता है।

विटामिन ए के संश्लेषण एवं संचयन का कार्य करता है।

यह रुधिर स्कंधकारी पदार्थ फाइबिनोजिन प्रोथ्रोबिन का भी संश्लेषण करता है।

छोटी आंत (small intestine)- अमाशय से आने वाले काइम अथवा तरल भोजन का पाचन छोटी आंत में होता है।

भोजन छोटी आंत में लगातार होने वाली पुनः सरण गति के फलस्वरुप अग्रसर होता है ऐसी गति लगभग 1 सेकंड तक रहती है तथा प्रत्येक गति के पश्चात कुछ सेकंड का विश्राम काल होता है। भोजन का पूर्ण पाचन छोटी आंत में ही होता है

बड़ी आत (large intestine)- यह पाचन निकाय (प्रणाली) का अंतिम भाग है जो मलाशय तक फैला है।

बड़ी आंत भोजन के पाचन में भाग नहीं लेती है।

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