रूस की क्रांति

19 वी सदी के पूर्वार्ध में लगभग यूरोप में सामाजिक राजनीतिक तथा आर्थिक परिवर्तन हो चुके थे।सामंतवादी कुचक्र से जनमानस को छुटकारा मिल चुका था। अधिकांश क्षेत्रों में राजशाही का अंत हो गया था तथा शासन की बागडोर मध्यम वर्ग के हाथों में आ गई थी किंतु रूसी अभी भी जारशाही शासन व्यवस्था का शिकार था। इसी निरंकुश जारशाही व्यवस्था के विरुद्ध जन आंदोलन हुआ जो रूसी क्रांति के नाम से प्रसिद्ध है । रूसी क्रांति का विश्व के इतिहास में विशेष महत्व है क्योंकि इस क्रांति ने ना केवल राजनीतिक क्षेत्र में वरन आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी परिवर्तन किए । रूस की क्रांति ने बुर्जुआ वर्ग (पूंजीपति वर्ग) व्यवस्था का सफाया कर दिया तथा देश के शासन पर सर्वहारा वर्ग (श्रमिक वर्ग) का आधिपत्य स्थापित किया । रूस में इस क्रांति ने वास्तविक समाजवाद की स्थापना की।
रूस में राजवंश- 1487 ईस्वी में इवान प्रथम ने जारसाही की स्थापना की।इसके बाद 1613 इस्वी में माइकल ने रोमनोव वंश की स्थापना की । इसी वंश के शासन काल में रूसी क्रांति हुई । रूस के प्रमुख शासकों में पीटर महान, कैथरीन द्वितीय, जारपाल, एलेग्जेंडर प्रथम, निकोलस प्रथम, एलेग्जेंडर द्वितीय ,अलेक्जेंडर तृतीय ,निकोलस द्वितीय विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
रूसी क्रांति की पृष्ठभूमि- 19 वी सदी के पूर्वार्ध तक रूस एक पिछड़ा एवं असभ्य देश था । रूस का समाज जारसाही एवं सामंतशाही का शिकार था तथा श्रमिकों एवं कृषकों की दशा अत्यंत निंदनीय थी। रूसी समाज में सामाजिक असमानताओं के कारण असंतोष उत्पन्न हो गया था।
निकोलस द्वितीय रूस का अंतिम सम्राट था जिसे 1917 ईस्वी में क्रांतिकारियों ने समाप्त कर सदा के लिए जारशाही का नामोनिशान मिटा दिया।
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