Google यह शब्द आज किसी परिचय का मोहताज नही है। हम सब सूचनाओं के आदान-प्रदान और जानकारियों को पाने के लिए गूगल जैसी सर्च इंजनों का उपयोग तो करते ही है। इंटरनेट की दुनियां में गूगल जैसी कई सर्च इंजन मौजूद है जैसे की Bing, Msn, Yahoo इनके अलावा भी कई सर्च इंजन है। इंटरनेट सूचनाओं का अपार भंडार है और ये सर्च इंजन हमें उन सूचनाओं तक पहुँचाते है। हम अपने कंप्यूटर, स्मार्टफोन या टैब के गूगल सर्च बार कुछ भी लिखकर उन सूचनाओं तक तुरंत पहुँच जाते है और हमें लगता है की पूरी इंटरनेट हमारी मुट्ठी में ही है। लेकिन ऐसा नही है, वास्तव में इंटरनेट का एक क्षेत्र आपकी पहुँच से बाहर है जिसे डार्क वेब(Dark Web) कहा जाता है। आपको जानकर आश्चर्य होगा की पूरी इंटरनेट का लगभग 90 से 95% हिस्सा डार्क वेब को माना जाता है क्योंकि ज्यादातर लोग डीप वेब(Deep web) को भी डार्क वेब का ही एक हिस्सा मानते है। वास्तविक रूप से डीप वेब और डार्क वेब दो अलग-अलग वेब क्षेत्र है और उनकी कार्यशैली भी अलग है।
वास्तव में डार्क वेब उन हजारों वेबसाइटों का एक संग्रह है जो अपनी आईपी एड्रेस(Internet Protocol address) को छिपाने के लिए टॉर(Tor) और आई2पी(I2P) जैसे गुमनाम सॉफ्टवेयर टूल्स का उपयोग करते हैं। Tor और I2P जैसे टूल्स डार्क वेब को गुमनाम बनाते है साथ ही इसके उपयोगकर्ताओं को निगरानी और सेंसरशिप से भी बचाते है। डार्क वेब इंटरनेट की दुनिया का खतरनाक क्षेत्र माना जाता है जहाँ न कोई नियम है न कोई कानून, कोई भी अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकता है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से हैकिंग, हथियारों की खरीद फरोख्त, ड्रग्स नशे को बेचना खरीदना, चाइल्ड पोर्नोग्राफी जैसी गैरकानूनी कार्यो के लिए उपयोग किया जाता है।
यदि बात केवल डार्क वेब की करें तो डार्क वेब विशेष रूप से उतना भी विशाल नहीं है जितना इसको प्रसारित किया जाता रहा है यह इंटरनेट का 90% प्रतिशत नहीं है और यह विशेष रूप से गुप्त भी नहीं है। वास्तविक डार्क वेब इसके विपरीत केवल .01% के आसपास होने की संभावना है। सुरक्षा शोधकर्ता निक क्यूब्रिलोविक(Nik Cubrilovic) ने डार्क वेब के संबंधित अपने शोध में 10,000 से अधिक टॉर द्वारा संचालित वेबसाइट और उनकी छिपी हुई सेवाओं की गिनती की जो लाखों नियमित वेबसाइटों की तुलना में बहुत कम है।
डार्क वेब की श्रेणी में आनेवाले वेबसाइटों का संग्रह आपको सार्वजनिक रूप से दिखाई नही देते लेकिन एक खास सॉफ्टवेयर टॉर ब्राउज़र(Tor Browser) की मदद से उन वेबसाइटों तक पहुँचा जा सकता है। यह एक ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर है जिसका उपयोग डार्क वेब को एक्सेस करने में किया जाता है लेकिन एक्सेस इतना सरल नही है। इस सॉफ्टवेयर की मदद से उन सर्वरों के आईपी पते को छिपा लिया जाता है। डार्क वेब में उपयोगकर्ता का कंप्यूटर ही उसका सर्वर होता है वो अपना आईपी एड्रेस छिपा लेता है या बदल सकता है इसलिए इसको रोक पाना मुश्किल होता है। इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति डार्क वेब साइट पर जा तो सकता है लेकिन यह पता नही लगा सकता वे कहां से या किसके द्वारा संचालित किए जा रहे है।
ज्यादातर सुरक्षा विशेषज्ञ ऐसे सॉफ्टवेयर उपयोग करने की सलाह नही देते है क्योंकि इन परिस्थितियों में आपके उपकरणों पर सायबर हमला होने का ख़तरा बढ़ जाता है। केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए इसका उपयोग सीमित रूप से किया जा सकता है। आधुनिक तकनीक इस क्षेत्र से भी पर्दा उठाने का प्रयास कर रहा है ताकि मनमाने तरीके से चल रहे गैरकानूनी कार्यो को रोका जा सकता हैं।