पुर्तगालियों के विषय में जानकारी भाग -2

अलफांसो डी अल्बूकर्क (1509-1515 )

- यह भारत में पुर्तगाली शक्ति का वास्तविक संस्थापक था।

- इसने 1510 में बीजापुर के शासक युसूफ आदिलशाह से गोवा छीन लिया  , इस गोवा की विजय में विजयनगर के शासक कृष्णदेव राय पुर्तगालियों की मदद किए थे विजय के बाद अल्बूकर्क ने गोवा को राजनैतिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया।

- अलफांसो डी अल्बूकर्क ने सेना में भारतीयों को नियुक्त किया।

- इसी ने गोवा में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसी के समय में पुर्तगाली पुरुष हुआ भारतीय महिलाओं के खूब विवाह हुए इसी कारण पुर्तगाली जनसंख्या बढ़ाने में मदद भी मिली।

- इसमें पुर्तगालियों को भारतीय महिलाओं से विवाह करने के लिए प्रेरित किया।

- इसने 1511 ईस्वी में मक्का पर कब्जा किया।

- इसने 1515 ईसवी में हरमुज पर कब्जा किया।

नीनो डी कुन्हा (1529-1538)

इसने 1530 में गोवा को को अपनी राजधानी बनाया इससे पहले राजधानी कोचीन थी।

इसी के साथ गुजरात का शासक बहादुर शाह हाथापाई करते हुए समुद्र में गिर गया और उसकी मृत्यु हो गई।

      कार्टेज आर्मेडा

यह एक पद्धति थी जिसके द्वारा पुर्तगाली अरब सागर से गुजरने वाले तमाम जहाजों से एक प्रकार का शुल्क वसूलते थे तथा बदले में उनको सुरक्षा प्रदान करते थे यह व्यवस्था कार्टेज आर्मेडा कहलाती थी। 

पुर्तगालियों की देन

- प्रिंटिंग प्रेस ( छापाखाना )

- पानी के जहाजों का निर्माण।

- भारत का व्यापार जापान के साथ प्रारंभ करने का श्रेय पुर्तगालियों को भी दिया जाता है

- गोवा में ईसाई धर्म न्यायालय की स्थापना।

- भारत में पहली बार गोथिक कला का विकास।

- तंबाकू , आलू पुर्तगालियों की ही देन है।



 

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