पुर्तगाली और अंग्रेज-

- पुर्तगालियों और अंग्रेजी में भी औरंगजेब के लिए समस्याएं उत्पन्न की। पुर्तग़ाली समुद्री डाकुओं ने बंगाल की खाड़ी में जहाजों के लूटनेका कार्य  फिर से   प्रारंभ कर दिया।

उन्होंने चटगांव को अपना केंद्र बनाया उनके विरुद्ध युद्ध करने के लिए औरंगजेब ने अपनी सेना भेजी इस सेना को पूर्ण सफलता मिली। क्योंकि उसने चटगांव पर ही अधिकार नहीं किया बल्कि बंगाल के पूर्वी भाग बात को भी मुगल साम्राज्य में मिला लिया पश्चिमी समुद्र तट पर इस समय अंग्रेज समुद्री डाकू उपद्रव का कर रहे थे ।वह भारतीय जहाजों को लूट लेते थे। सूरत में अंग्रेजों का एक कारखाना था वहीं से अंग्रेज लोग व्यापार करते थे औरंगजेब के शासनकाल के अंतिम दिन साम्राज्य उतना शक्तिशाली नहीं रह गया था जितना वह अकबर के शासनकाल में था औरंगजेब कुछ परंपरा वादी मुसलमानों के प्रभाव में आ गया था तथा उसने इस्लाम धर्म के नियमों के अनुसार शासन  करने का निश्चय  किया ।

 उसकी यह नहीं थी उसके पूर्वजों की शासन नीति से भिन्न थी।औरंगज़ेब एक परंपरा वादी मुसलमान बन गया था  और वह अपने धार्मिक सिद्धांतों के प्रति पूर्ण निष्ठावान था वह दरबार के विलासिता पूर्ण जीवन से विरक्त हो गया था।  और और पूर्ण रूप से धार्मिक विश्वासों पर आधारित था।  इस प्रकार  पुर्तगाली और अंग्रेज में इस प्रकार की भिन्नता थीं।

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