चर्च के विरुद्ध विद्रोह-

 14वी सदी से चर्च के कुछ धर्म सिद्धांतों का विरोध और बुराइयों के विरुद्ध विद्रोह आरंभ हुआ।

कैथोलिक चर्च की भाषा लैटिन थी जिसे आम जनता समझ नहीं पाती थी। यूरोप की किसी भी आधुनिक भाषा में धर्म ग्रंथ उपलब्ध नहीं थे।लैटिन, हिब्रू और ग्रीक भाषाओं को पवित्र समझा जाता था।

वाइक्लिफ बाइबल के पहले अंग्रेजी अनुवाद का प्रेरक और समर्थक था आम जनता में धर्म ग्रंथों के ज्ञान का प्रचार करने के गरीब प्रचारकों का एक दल बनाया।

1401 ईसवी में इग्लैंड  की पार्लियामेंट ने धर्म विरोधियों को जलाने के औचित्य के बारे में एक कानून बनाए।

वाइक्लिफ के देहांत के 34 साल बाद उस धर्म  विरोधी होने का आरोप लगाया गया और उसकी कब्र में की हड्डियां खोदकर निकाली गई। और उन्हें जलाया गया और उनकी राख को नदी में फेंक दिया गया ।

वाइक्लिफ की शिक्षाओं का उसके शिष्यों ने इंग्लैंड के बाहर भी  प्रचार किया उसमें एक चेकोस्लाविय का जान हुस  था । जिसे धर्म विरोध के लिए अपराधी घोषित किया गया और 1415 ईसवी में  खूंटे से बांधकर जिंदा जला दिया गया उसको मृत्युदंड दिए जाने के बाद उसके देश में एक प्रबल विद्रोह हुआ परिणाम स्वरूप वहां कुछ वर्षों के लिए गणतंत्र की स्थापना हुई।

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