- 1595-96 में भारत में आने वाला पहला डच यात्री कार्नेलियस हाउटमैन था।
- 1605 में मसलीूपट्टनम में डचों की भारत में लगने वाली पहली फैक्ट्री थी।
- 1606 में पेत्तोपोली में (आंध्र प्रदेश में है ) वहां फैक्ट्री लगाई गयी।
- 1610 में पुलीकट तमिलनाडु में फैक्ट्री लगाई गई।
डचों ने एक सोने का सिक्का चलाया जिसका नाम पे पैगोड़ा था।
1616 में सूरत में फैक्ट्री लगाई गई
1627 में पिपली में लगाई गई।
1668 में मेगा पटनम में लगाई गई
इनके द्वारा भारत में बहुत से स्थानों पर फैक्ट्रियों की स्थापना की गई थी।
प्रारंभ में डच प्रशासन कुलीकट से चलाया जाता था लेकिन बाद में इसे मेगापट्टनम से संचालित किया जाने लगा।
बेदरा का युद्ध (1759)
- यह युद्ध ब्रिटिश तथा डचों के बीच में लड़ा गया। इस युद्ध में डचों की पराजय हुई जिसमें उनकी स्थिति कमजोर हो गई और अंततः 1795 डच भारत छोड़कर चले गए।
- डच एक अर्ध सरकारी कंपनी थी जो एक निदेशक मंडल के द्वारा चलाई जाती थी इसमें कुल 17 व्यक्ति होते थे जिन्हें जेंटलमैन 17 कहा जाता था।
- डचों की व्यापारिक संस्था सहकारिता पर आधारित थी।
यह भारत में ऐसी कंपनी थी जो सहकारिता से व्यापार करते थी।
- औरंगजेब के समय में 3.5 प्रतिशत वार्षिक चुंगी पर बंगाल, बिहार , उड़ीसा में व्यापार का अधिकार डचों को दिया गया था।
डचों की असफलता का कारण
- भ्रष्टाचार
- अयोग्य प्रशासक
- सरकारी नियंत्रण
- वेदरा का युद्ध
- इनकी भारत से ज्यादा रुचि इंडोनेशिया के मसाला व्यापार पर थी तथा डचों ने भारत में मसाला व्यापार के स्थान पर भारतीय कपड़ों को विशेष महत्व दिया था।