रूस की क्रांति से पूर्व की दशा-२

रूस की सामाजिक दशा- 1861 ईस्वी से पूर्व रूस सामंतवादी व्यवस्था का शिकार था उस समय रूसी समाज में 3 वर्ग थे 
उच्च वर्ग
मध्यम वर्ग 
सर्वहारा वर्ग
उच्च वर्ग में जारशाही के सदस्य सामंत उच्च अधिकारी आदि सम्मिलित थे इनका जीवन सुखी एवं समृद्ध था इस वर्ग के पास धन की अधिकता के कारण विलासी जीवन की सभी सुविधाएं मौजूद थी इस वर्ग के लोग अपनी जमीनों पर कृषि दास या अर्ध दासो से खेती करवाते थे दूसरा वर्ग मध्यमवर्ग था इसमें लेखक विचारक दार्शनिक छोटे व्यापारी व छोटे सामंत सम्मिलित थे तीसरा वर्ग सर्वहारा वर्ग था इसमें कृषि दास कारीगर एवं मजदूर सम्मिलित थे इस वर्ग की दशा शोचनीय थी उन्हें कठोर परिश्रम के बाद भी भरपेट भोजन नहीं मिल पाता था समाज में इन्हें कोई स्थान प्राप्त नहीं था कुलीन वर्ग के लोग घृणा की दृष्टि से देखते थे उसी समाज में भ्रष्टाचार का बोलबाला था।
मेन सिविक दल का प्रमुख नेता करेंस्की था।इस दल के लोग शांति और अहिंसा के समर्थक थे मैनशेविक दल के लोग वैधानिक रूप से शासन में परिवर्तन के पक्षी पोषक थे बोल्शेविक रूस का शक्तिशाली राजनीतिक दल था देश के अधिकांश श्रमिक व मजदूर इस दल के सदस्य थे इस दल के लोग क्रांतिकारी व हिंसक विचारधारा के पक्ष को सकते यह दल राजनीतिक क्रांति करके बलपूर्वक शासन सकता पर प्रभुत्व स्थापित करना चाहता था लेनिन इस दल के प्रमुख नेता था।
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