आर्किमिडीज का सिद्धांत (Archimedes's principle) - किसी वस्तु को द्रव में आंशिक या पूर्णतः डुबोने पर उसके भार में आयी आभासी कमी उसके द्वारा हटाये गये द्रव के भार के बराबर होती है।
आर्किमिडीज के नियम का दैनिक जीवन में अनुप्रयोग-
1. जलयान व पनडुब्बियों के डिजाइन निर्माण में।
2. दुग्धमापी (Lactometer) के निर्माण में।
3. हाइड्रोमीटर (द्रव घनत्व मापी) के निर्माण में।
4. जीवन रक्षक पेटी (Life Belt) के निर्माण में।
प्रत्यास्थता (Elasticity)- यह पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण वस्तु, उस पर आरोपित वाह्य बल से उत्पन्न किसी भी प्रकार के परिवर्तन का विरोध करती है तथा जैसे ही बल हटा लिया जाता है, वह वस्तु अपनी पूर्वावस्था में वापस आ जाती है।
रबर की डोरी खींचने पर उसकी लम्बाई बढ़ जाती है परन्तु छोड़ देने पर वह अपनी पूर्व अवस्था में लौट आती है पदार्थ के इस गुण को प्रत्यास्था तथा जिन वस्तुओं में यह गुण पाया जाता है उन्हें प्रत्यास्थ वस्तुएँ कहा जाता है।
कुछ आम धातुओं का प्रत्यास्थीय व्यवहार निम्नलिखित है-
1. शुद्ध लोहा लचीला होता है, किन्तु प्रत्यास्थ नहीं होता है।
2. इस्पात लचीला तथा प्रत्यास्थ दोनों ही होता है।
3. ताँबा तन्य होता है।
4. ढलवां लोहे में कार्बन की मात्रा 3% से 4% होती है यह न तो लचीला होता है और न ही प्रत्यास्थ।
5. सीसा आघातवर्ध्य होता है और इसमें सुघट्तया भी पायी जाती है।