नगर निगम का गठन

नगर निगम

बड़े बड़े नगरों में नगर निगम होते हैं भारत में कई नगरों के नगर निगम हैं नगर निगम के सदस्यों का निर्वाचन 5 वर्ष के लिए होता है।   नगर निगम में निम्नलिखित सदस्य होते हैं।

मेयर तथा उपमेयर

नगर निगम के प्रधान को मेयर कहा जाता है। उसे महापौर और निगमपति के नाम से भी जाना जाता है उसे नगर का प्रथम नागरिक कहा गया है। मेयर के  कार्यो में मदद के उप मेयर भी होता है। मेयर का मुख्य कार्य निगम की बैठकों की अध्यक्षता करना तथा उसका संचालन करना है। मेयर की अनुपस्थिति में उपमेयर निगम की बैठक की अध्यक्षता एवं संचालन का कार्य करता है।

समितियां

निगम परिषद के अलावा अलग-अलग कार्यों के लिए भी कुछ समितियां बनाई जाती हैं जैसे शिक्षा के लिए शिक्षा समिति, बाजार के लिए बाजार समिति आदि प्रत्येक समिति अपने क्षेत्र के संबंध में निगम को आवश्यक सलाह देती है।

मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी

नगर निगम का सबसे बड़ा पदाधिकारी मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी होता है नगर निगम के सभी कार्यों का उत्तरदायित्व उस पर होता है। कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को नियुक्त करने का अधिकार इस ही प्राप्त है। मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी की नियुक्ति राज्य सरकार करती है इसकी नियुक्ति 5 वर्ष के लिए की जाती है। यह नगर निगम का वास्तविक शासक होता है यह नगर निगम के कार्यो की रिपोर्ट राज्य सरकार को देता है। इस तरह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी राज्य सरकार और नगर निगम के बीच कड़ी का काम करते हैं।

नगर निगम के प्रमुख कार्य

सड़कों का निर्माण मरम्मत एवं सफाई करवाना, नालियों का निर्माण सार्वजनिक स्थानों के कूड़े करकट की सफाई,  रोशनी का प्रबंध करना, पीने के पानी का प्रबंध करना, पशुओं की रक्षा करना लोगों के स्वास्थ्य विभाग का प्रबंध करना, बाजार, हाट, मेले का प्रबंध करना, खतरनाक तथा नशीली चीजों की खरीद बिक्री पर नियंत्रण करना, आग लगने पर बुझाने का प्रबंध करना, बच्चा जन्म देने वाली माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए बच्चा घर और उसका प्रबंधन नगर निगम के प्रमुख कार्य हैं।

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