अंग्रेजों का भारत आगमन

1553 में इवेंट कंपनी को स्थल मार्ग से व्यापार करने की अनुमति प्राप्त हुई थी लेकिन इन्हें विशेष सफलता नहीं प्राप्त हो सकी इसके बाद 1599 मर्चेंट एडवेंचर्स कंपनी की स्थापना की गई और इस कंपनी को बाद में ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम से जाना जाने लगा। 

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ टेलर-1 ने 31 दिसंबर 1600 को शाही आदेश पर हस्ताक्षर कर पूर्व के साथ 15 वर्षों के लिए व्यापार की अनुमति प्रदान की। 

1599 में जॉन मिल्टन हॉल नामक नामक व्यापारी भारत आया यह भारत आने वाला पहला ब्रिटिश व्यापारी था जो स्थल मार्ग के द्वारा भारत आया था और यह लिवएंड कंपनी का प्रतिनिधित्व करता था। 

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का पहला गवर्नर टॉमस स्मिथ  था। 

सन 1608 के हॉकिंस भारत आया था। 

कैप्टन हॉकिंस जहांगीर से आगरा में मिला था तथा टॉमस रो जहांगीर से अजमेर में मिला था। 

1632 में गोलकुंडा के सुल्तान अब्दुल्लाह कुतुब शाह ने अंग्रेजों को स्वर्णिम फरमान दिया था। 

इस फरमान के तहत 500 पैगोडा वार्षिक कर के बदले अंग्रेजों ने गोलकुंडा राज्य में स्थित बंदरगाहों से व्यापार करने का एकाधिकार प्राप्त कर लिया था। 

1633 में हरिपुरा तथा बालासोर में अपने कारखाने अंग्रेजों ने स्थापित कीजिए। 

1647 में मद्रास में इनकी कंपनी स्थापित हुई फ्रांसिस डे के नेतृत्व में चंद्र जी के राजा वेंकटप्पा से मद्रास को पट्टे पर लिया गया तथा यहीं पर अपनी कोठी स्थापित कर फोर्ट सेंट जॉर्ज नाम रखा गया। 

1641 में अंग्रेजों ने अपना मुख्यालय मसूलीपट्टनम से स्थानांतरित कर मद्रास में स्थापित किया। 

1658 में बंगाल बिहार उड़ीसा तथा कोरोमंडल की सभी बस्तियां मद्रास के अधीन कर दी गई। 

1668 में मुंबई में कारखाना स्थापित किया गया जिसे गोराल्ड औंगयार ने स्थापित किया। 

गोराल्ड ने यह स्टेटमेंट दिया कि "अब वक्त आ गया है कि व्यापार के साथ-साथ तलवार भी उठा लेनी चाहिए। "

लेख जारी है .....

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