मुस्लिम सुधार आंदोलन-

 मुसलमानों में जागरण के शुरुआत 19वीं सदी के पूर्वार्ध में बरेली के सैयद अहमद शरीयत उल्लाह जैसे नेताओं के प्रयासों से हुई।

उनका विचार था कि इस्लाम धर्म के ह्रास के कारण भारत अंग्रेजों का गुलाम बना वे इस्लाम को सुधारने तथा मजबूत बनाने और इस्लामी शिक्षा की वृद्धि में जुट गए ।बंगाल में शुरू किए गए फरेंजी आन्दोलन के नेता थे ।

उन्होंने मुसलमानों में मौजूद जाति भेद राणा की निंदा की अंग्रेजी शिक्षा और उनके सामाजिक तथा आर्थिक लाभों से वंचित करण भारतीय मुसलमानों में अधिक समय तक मध्यम वर्ग नहीं हो सका कुछ प्रबुद्ध मुसलमानों ने अनुभव किया कि शासकों के साथ सहयोग की नीति अपनाई जाए वह अंग्रेजी शासकों की मदद से अपनी सामाजिक स्थिति सुधारना चाहते थे आधुनिक शिक्षा के प्रसार के लिए पर्दा प्रथा तथा बहु पत्नी पर था जैसे सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए कुछ आंदोलन भी प्रारंभ हुए नवाब अब्दुल लतीफ 1863 में ताकि मुस्लिम साहित्य सभा लखन था इन्हें बंगाल के मुस्लिम पुनर्जागरण का पिता कहा जाता है 

-मुसलमानों में आधुनिक शिक्षा के प्रसार और सामाजिक सुधार के लिए सबसे महत्वपूर्ण आंदोलन सर सैयद अहमद खान ने शुरू किया था मुसलमान के पुनरुत्थान के लिए अंग्रेजी शिक्षा अपनाने पर जोर दिया और 1864 में उन्होंने अनुवाद समिति की स्थापना की जिसे बाद में वैज्ञानिक  समिति का नाम दिया गया।

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