उन्नीसवीं सदी के मध्यकाल के आसपास भारतीय राजनीतिक सभाएं स्थापित होने लगी की स्थापना कलकत्ता, बंबई और मद्रास जैसी प्रेसिडेंसी नगरों में हुई ।
इनसे अन्य बातों के अलावा देश के प्रशासन में भारतीयों को भागीदार बनाने की मांग उठाई गई ।भारतीय जनता के कल्याण में इनके अधिकारियों के पास आवेदन भेजने के लिए 1852 में मुंबई एसोसिएशन की स्थापना हुई। ऐसे ही उद्देश्य के लिए 1852 में मद्रास नेटिव असोसिएशन की स्थापना हुई ।
इन सभी सभाओं के सदस्य अधिकतर भारतीय समाज के उच्च वर्गों के लोग थे इनकी गतिविधियां सीमित थी प्रशासन में सुधार करने के लिए सरकार के संचालन में भारतीयों को भागीदार बनाने के लिए, करो में कमी करने और भारतीयों के भेदभाव की नीति समाप्त करने के लिए सरकार और ब्रिटिश पार्लियामेंट के पास याचिकाएं भेजना।
यद्यपि यह सभा में मुख्यतः अपने-अपने प्रांतों में ही काम करती थी परंतु इनके घोषित उद्देश्य भारतीय जनता के उद्देश्य थे ना कि देश के किसी एक प्रदेश या समुदाय के उद्देश्य थे।
कुछ घटनाओं के कारण 1870 और 1880 के दशक में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध असंतोष और अधिक बढ़ गया सरकार ने भारतीय को पूरा करने के लिए प्रयास के विरूद्ध दमनकारी कदम उठाए।
भारत में अंग्रेज और भारतीय न्यायाधीशों के बीच समानता स्थापित करने के उद्देश्य से ही यह विधेयक पेश किया गया था।