समुद्र विज्ञान के अंतर्गत निम्नलिखित खंडों का अध्ययन किया जाता है जो निम्नलिखित हैं -
(1)- महासागरों का क्षेत्रीय करण - महासागरों का क्षेत्रीय कारण निम्नलिखित आधारों पर किया जाता है।
प्रकाश की प्रवेशयता के आधार पर- इस आधार पर सागर को तीन मंडलों में बांटा जाता है।
- प्रकाशित मंडल
- विसरण मंडल
- अप्रकाशित मंडल
प्रकाशित मंडल में सूर्य किरणों की प्रत्यक्ष प्राप्ति के कारण प्रकाश संश्लेषण पादप समुदाय पाया जाता है जिसे पादप प्लवक कहा जाता है।
सागर की 99% से अधिक जैव विविधता तथा जैव द्रव्यमान इसी मंडल में पाया जाता है।
200 से 1000 मीटर की गहराई के मध्य सूर्य का विसरित प्रकाश प्राप्त होता है इसलिए इसे धुंध मंडल कहा जाता है। इस मंडल में सागर की 1% से कम जैव विविधता पाई जाती है।
1000 मीटर से अधिक गहराई पर सूर्य प्रकाश न पहुंचने के कारण जैव समूह नहीं प्राप्त होता इसलिए इसे अप्रकाशित मंडल कहा जाता है।
(2)- जैव पारिस्थितिकी विभाजन यह विभाजन निम्नलिखित खंडों में विभक्त है।
- littoral zone
- neritic zone
- benthic zone
- abyssal zone
- pelagic zone
सागर का वह तटीय क्षेत्र जहां उच्च ज्वार के समय जल तथा भाटा के समय स्थल की प्राप्ति होती है उसे littoral zone कहां जाता है।
सागर तल से 200 मीटर की गहराई तक का तटीय क्षेत्र जो जल में डूबा हुआ होता है neritic zone कहलाता है।
200 मीटर से 2000 मीटर की गहराई का मंडल benthic zone कहलाता है।
2000 मीटर से सागर नितल तक का हुआ क्षेत्र जहां प्रकाश की अनुपस्थिति होती है इसे abyssal zone कहा जाता है।
सागर का वह संपूर्ण भाग जहां उत्प्लवित अवस्था में पादप एवं जंतु प्लवक पाया जाता है उसे pelagic zone कहा जाता है ।
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