केंद्रीय मंत्री मंडल द्वारा हाल ही में जापान के साथ 75 अरब डॉलर के करेंसी स्वैप समझौते को मंजूरी दे दी गई है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच वर्ष 2018 के अक्टूबर माह में मुद्रा विनियमन समझौते पर सहमति प्रदान की गई है।
यह समझौता भारत जापान आर्थिक संबंधों में एक मील का पत्थर के रूप में साबित होगा। जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और सामरिक सहयोग में वृद्धि होगी जिसका लाभ है परस्पर दोनों देशों को प्राप्त होगा।
यह समझौता एक विदेशी विनिमय समझौता है जिसमें दोनों देश के बीच में एक दूसरे के मुद्रा के प्रयोग को निश्चित समय तक के लिए प्रावधान किया गया है।
करंसी स्वैप समझौता का लाभ - इस समझौते से भारत को निम्नलिखित लाभ होंगे।
- करंसी स्वैप समझौता से भारत को आयात कप्तान करने में आसानी होगी और इसके साथ ही साथ है और मूल्य की समस्या का भी निवारण किया जा सकेगा।
- इसमें स्थानीय मुद्राओं में व्यापार किया जाता है
- इस समझौते के द्वारा दोनों देश अपने अपने आयात व निर्यात के लिए अपनी ही मुद्रा से भुगतान कर सकेंगे।
- करंसी स्वैप समझौता से तरलता को बेहतर बनाने में ही सहायता प्राप्त होगी।
- मुद्रा विनियमन मुश्किल समय में काफी मददगार साबित होगा।
- इस समझौते का यह लाभ होगा कि किसी अन्य मुद्रा की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और मुद्रा विनियमन पर व्यर्थ व्यय नहीं करना पड़ेगा।
- देश के भुगतान शेष को भी मुद्रा विनियमन से स्थिर रखा जा सकेगा।