उच्च न्यायालय
जिस तरह केंद्र में एक सर्वोच्च न्यायालय है, उसी तरह प्रत्येक राज्य में भी उच्च न्यायालय का गठन किया जाता है उच्च न्यायालय ही राज्य का सबसे बड़ा न्यायालय होता है उसके आधीन भी कुछ न्यायालय होते हैं उच्च न्यायालय का गठन अनुच्छेद 214 के अंतर्गत किया गया है वर्तमान में भारत में उच्च न्यायालय ने केंद्र शासित प्रदेशों में केवल दिल्ली में उच्च न्यायालय है।
उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार
प्रत्येक उच्च न्यायालय को नौकाधिकरण, इच्छापत्र ,तलाक, विवाह, कंपनी न्यायालय की अवमानना तथा कुछ राजस्व संबंधी प्रकरण नागरिकों के मौलिक अधिकारों के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक निर्देश विशेषकर बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, निषेध उत्प्रेषण, तथा अधिकार पृच्छा के लेख जारी करने के अधिकार प्राप्त है।
फौजदारी मामलों में अगर सत्र न्यायधीश ने मृत्युदंड दिया हो तो उच्च न्यायालय में उसके विरुद्ध अपील हो सकती है। दीवानी मामलों में उच्च न्यायालय में सब मामलों की अपील हो सकती है जो ₹5000 या उससे अधिक संपत्ति से संबद्ध है। उच्च न्यायालय पेटेंट और डिजाइन, उत्तराधिकार, भूमि प्राप्ति, दिवालियापन और संरक्षकता आदि मामलों मे अपील सुनता है।
यदि किसी उच्च न्यायालय को ऐसा लगे कि जो अभियोग अधीनस्थ न्यायालय में विचाराधीन है वह विधि किसी सारगर्भित से संबद्ध है तो वह उसे अपने यहां हस्तांतरित कर या तो उसका निपटारा करता है या विधि से संबद्ध प्रश्न को निपटाकर अधीनस्थ न्यायालय के निर्णय के लिए वापस दे देता है।
उच्च न्यायालय को अपने अधीनस्थ न्यायालयों में नियुक्ति, पदोन्नति तथा छुट्टियों के संबंध में नियम बनाने का अधिकार है।