इस नए समझौते के अनुसार जम्मू कश्मीर ने भारत को अपने तीन विषयों को हवाले कर दिया। रक्षा, विदेशी मामले, दूरसंचार इस समझौते पर हस्ताक्षर करके भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर से यह वादा किया कि जब तक जम्मू कश्मीर का एक अलग संविधान नहीं होगा।
तब तक भारत औपचारिक रूप से अपने संविधान के अनुसार जम्मू और कश्मीर को व्यवस्थित करता रहेगा। इसी के साथ भारत के संविधान में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को 17 नवंबर 1952 में शामिल किया गया था।
इस अनुच्छेद के अनुसार जम्मू और कश्मीर भारतीय संघ का संवैधानिक राज्य है। किंतु केंद्र सरकार इसके नाम क्षेत्र को तभी परिवर्तित कर सकता है। जब इसके राज्य सरकार की इसमें सहमति हो, अन्यथा नहीं।
इस अनुच्छेद के अनुसार रक्षा, विदेश मामले और संचार को छोड़कर कोई भी कानून, सरकार इस पर बिना राज्य सरकार की सहमति से नहीं थोप सकता है।
विशेष राज्य का दर्जा मिलने से जम्मू और कश्मीर के लोगों प्राप्त होने वाले लाभ-
भारत देश के किसी अन्य राज्य के लोग जम्मू-काश्मीर में अपनी संपत्ति नहीं खरीद सकते किंतु जम्मू कश्मीर के लोग भारत के किसी भी कोने में अपनी संपत्ति बना सकते हैं। एक तरह से देखा जाए तो जम्मू और कश्मीर में अब भी संपत्ति का मौलिक अधिकार है जो भारत में अनुच्छेद 31 के तहत खत्म कर दिया गया था।
यह भी एक रोचक तथ्य है कि यदि कश्मीरी महिला भारत किसी भारतीय पुरूष से शादी कर के बंधन में बंध जाती है तो उसकी कश्मीरी नागरिकता खत्म कर दी जाएगी इसके विपरीत यदि कोई पाकिस्तानी लड़का किसी कश्मीरी लड़की से शादी कर लेता है तो उसे भारत देश की नागरिकता भी मिल जाती है।
जैसा कि संविधान में दिया गया है कि कोई भारतीय विदेश चला जाता है तो कुछ समय पश्चात उसकी कश्मीरी नागरिकता खत्म कर देती है।
परंतु कोई कश्मीरी जम्मू और कश्मीर का नागरिक पाकिस्तान चला जाता है, तो उसके वापस आने पर उसे भारत की नागरिकता भी मिल जाती है ।
अनुच्छेद 370 के कारण ही केंद्र सरकार आर्थिक आपातकाल नहीं लगा सकता है। आर्थिक आपातकाल को अनुच्छेद (360) अंतर्गत रखा गया है।