प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का प्रारंभ अप्रैल 2015 में किया गया था जिसका मुख्य उद्देश्य छोटे-छोटे ऋणार्थियों को जमानत मुक्त ऋण प्रदान करना है इस योजना के लिए सरकार ने 20000 करोड रुपए की धनराशि का निवेश किया है।
इस योजना के अंतर्गत छोटे व्यापारियों को ₹50000 से लेकर ₹1000000 तक का ऋण दिया जाएगा। साथ ही साथ गैर कृषि कार्य जैसे - दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन ,आदि के लिए 1000000 रुपए तक का ऋण दिया जाएगा।
इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को एक मुद्रा कार्ड दिया जाता है जिसका प्रयोग वह एटीएम और कार्ड मशीनों में कार्य पूंजी प्राप्त करने के लिए कर सकते हैं।
मुद्रा योजना द्वारा दिए जाने वाले ऋण को निम्नलिखित तीन भागों में बांटा गया है।
- शिशु ₹50,000 तक
- किशोर ₹50,001 से ₹5,00,000 तक
- तरुण ₹5,00,001 से 10,00,000 रुपए तक
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का मुख्य उद्देश्य
- इस योजना का मुख्य उद्देश्य बेरोजगार व्यक्तियों को रोजगार देने तथा कुछ आमदनी करने के लिए खेती के अलावा भी अन्य व्यवसाय में सहयोग करना है जैसे निर्माण प्रसंस्करण व्यापार सेवा आदि।
इस योजना के अंतर्गत व्यक्ति जो अपनी आमदनी के लिए कार्य करना चाहता है किंतु मुद्रा के अभाव में वह सफल नहीं हो पाता ऐसे व्यक्तियों को इस योजना के तहत 1000000 रुपए तक का ऋण दिया जाएगा।
इसके लिए पंजीकरण भी होगा और साथ ही साथ मुद्रा बैंक की सहायता से वित्त संस्थाओं के नेटवर्क पर नजर भी रखी जाएगी।
वित्तीय समावेशन कि पहुंच को बढ़ाना भी इस योजना का मुख्य उद्देश्य है साथ ही साथ इस योजना का उद्देश्य है कि यदि लोग ऋण लेकर अपना व्यवसाय करते हैं तो रोजगार में वृद्धि होगी तथा साथ ही साथ देश का विकास दर भी बढ़ेगा।
जब रोजगार बढ़ेगा तब कर देने वालों की संख्या में भी वृद्धि होगी जिसका प्रत्यक्ष परिणाम यह होगा कि देश की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा और ज्यादा कर एकत्रित होगा।
इस योजना के अंतर्गत बेरोजगारी को नियंत्रित किया जाएगा तथा लघु एवं ग्रामीण उद्योगों को भी बढ़ाया जा सकेगा जिससे ज्यादा से ज्यादा युवा वर्ग रोजगार प्राप्त कर सकेगा ।